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Indore News: बीआरटीएस नहीं हटने पर सुनवाई, कोर्ट ने कहा- काम नहीं करने पर ठेकेदार पर लगाए पेनल्टी

Mon, 19 Jan 2026 11:04 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर के बीआरटीएस हटाने के मामले में हाई कोर्ट ने अधिकारियों की बहानेबाजी पर  कहा कि  सरकारी विभागों की आपसी खींचतान और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण शहर की जनता को परेशान नहीं किया जा सकता। दस माह बाद भी बीआरटीएस क्यों नहीं हट पाया। 
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आधा टूटा बीआरटीएस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दस माह पहले दिए गए बीआरटीएस हटाने के आदेश का पालन करने में नाकाम नगर निगम के अफसरों को कोर्ट के कड़े रुख का सामना करना पड़ा। कोर्ट ने अफसरों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब लोगों की परेशानियों को और बढ़ने नहीं दिए जाएगा। अफसर एक दूसरे विभागों पर जिम्मेदारी थोप कर बहानेबाजी से नहीं बच सकते है। कोर्ट ने कहा कि यदि ठेकेदार तय समय में काम पूरा नहीं करता है तो नगर निगम पर भी जुर्माना लगाया जाए।

 

इंदौर बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने के मामले में सोमवार को हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी के सुनवाई हुई। कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा बीआरटीएस की बहानेबाजी करना अब नहीं चलेगा। आखिर क्या वजह है कि बीआरटीएस दस माह बाद भी नहीं हट पाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अफसर अपना काम सही तरीके से नहीं कर रहे है। उन्हें शहरवासियों की परेशानी की चिंता भी नहीं है।

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इस बार सुनवाई में कलेक्टर शिवम वर्मा, निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। कोर्ट के समक्ष अफसरों ने कहा कि शहर विकास की के लिए अायोजित बैठक में एलिवेटेड काॅरिडोर बनाने पर चर्चा हुई। इस कारण एक तरफ रैलिंग रखना सुरक्षित है, ताकि हादसे न हो।

 

याचिकाकर्ता की तरफ से पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट अजय बगाडिया ने कहा कि बीआरटीएस को हटाने का निर्णय खुद सरकार ने लिया था, लेकिन एक साल से मामला लटका हुआ है। अब एलिवेटेड कॉरिडोर का बहाना बनाकर हाई कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है और बस स्टॉप व रैलिंग हटाने में जानबूझकर देरी की जा रही है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि जो एलिवेटेड कॉरिडोर सात साल पहले मंजूर हुआ था, उसका शिलान्यास वर्ष 2024 में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस काम नहीं दिखा। कोर्ट ने अगली सुनवाई 28 जनवरी को तय की है।

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