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Indore News: भाजपा निगम परिषद के चार साल: इंदौर में बड़े प्रोजेक्टों पर जोर, पानी और सड़कों में कमजोर

Tue, 04 Aug 2026 07:40 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में भाजपा की परिषद चार साल में कितनी सफल रही है? इसका हिसाब जनता अगले साल होने वाले चुनाव में देगी। शहर में बड़े प्रोजेक्ट तो शुरू हुए, लेकिन दूषित पानी, खराब सड़कों ने जनता को खूब परेशान किया। इस रिपोर्ट में पेश है चार साल का लेखा-जोखा-
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इंदौर में इस साल लोगों जलसंकट झेला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर नगर निगम में काबिज भाजपा परिषद का चार साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। एक साल बाद इंदौर में फिर नगर निगम के चुनाव होंगे। चार साल के कार्यकाल को भाजपा संतोषजनक मान रही है। इन चार वर्षों में निगम परिषद का बड़े प्रोजेक्टों पर तो जोर रहा, लेकिन शहर में गंदे पानी की आपूर्ति और गड्ढों से भरी सड़कों की समस्या से शहरवासी परेशान होते रहे।

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मूलभूत समस्याओं को हल करने में कहीं न कहीं भाजपा की मौजूदा परिषद पूर्व की परिषदों की तुलना में कमजोर रही। हालांकि, शहर की सफाई व्यवस्था को बरकरार रखा गया। शहर में अभी भी कई प्रोजेक्टों पर काम चल रहा है। अब यह देखना है कि ये काम मौजूदा परिषद के कार्यकाल में पूरे हो पाएंगे या नहीं? डेढ़ साल बाद उज्जैन में सिंहस्थ भी लगने वाला है, ऐसे में भाजपा परिषद के लिए सिंहस्थ से जुड़े कामों को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण साबित होगा।

भागीरथपुरा पेयजल कांड धब्बा

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले साल दूषित पेयजल के कारण 35 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी और डेढ़ हजार से ज्यादा लोग बीमार हो गए थे। नर्मदा लाइन में गंदा पानी मिलने के कारण क्षेत्र के बाशिंदों को डायरिया हो गया था।

इस दूषित पेयजल कांड के कारण इंदौर नगर निगम की बदनामी पूरे देश में हुई। अभी भी शहर के कई इलाकों में दूषित पानी की समस्या बनी हुई है। इस साल शहर में मानसून की देरी के कारण जलसंकट भी खूब हुआ। बोरिंग सूखने के कारण 500 से ज्यादा टैंकर किराए पर लेकर नगर निगम को चलाने पड़े, इसके बाद भी कई क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत रही।

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इंदौर की कई सड़कें उबड़ खाबड़ हो गई। - फोटो : amar ujala

100 करोड़ के घोटाले का दाग

भाजपा परिषद के कार्यकाल में 100 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ, हालांकि, यह घोटाला पुरानी परिषद के समय से चला आ रहा था। मौके पर काम हुए नहीं और उनकी फाइलें बनकर तैयार हो गईं तथा बिल भी मंजूर होते रहे। जिन अधिकारियों को कामों का भौतिक सत्यापन करना होता था, वे भी इस घोटाले में शामिल थे। अभी भी इस घोटाले की जांच चल रही है। ईडी ने हाल ही में आरोपियों की करोड़ों की संपत्तियां अटैच की हैं।

 

ये काम शुरू कराए निगम परिषद ने

इंदौर में हर साल नर्मदा परियोजना के बिजली बिल पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसे कम करने के लिए नगर निगम ने 300 करोड़ रुपये की लागत से महेश्वर के समीप जलूद में सोलर प्लांट लगाया। इससे हर माह करीब पांच करोड़ रुपये की बचत हो रही है।

शहर में भविष्य में पानी की चिंता न रहे, इसके लिए नर्मदा के चौथे चरण का काम नगर निगम ने शुरू किया है। इस पर करीब 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

400 करोड़ रुपये की लागत से मास्टर प्लान की 23 सड़कों का काम शुरू हुआ है। फिलहाल शहर में 10 से ज्यादा सड़कों पर बाधक हिस्सों को हटाकर चौड़ीकरण किया जा रहा है।

निगम ने हुकमचंद मिल की जमीन का समाधान निकाला और श्रमिकों को उनका हक का पैसा दिलवाया। 40 एकड़ जमीन पर हाउसिंग बोर्ड प्रोजेक्ट ला रहा है।

 

ये काम नहीं हो पाए शुरू

शहर में 50 साल पुराने नेहरू स्टेडियम के स्थान पर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनना था, लेकिन वह प्रोजेक्ट अभी तक शुरू नहीं हो पाया।

नगर निगम की खुद की वेबसाइट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है। इस कारण कई ऑनलाइन सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पा रही हैं।

एमआर-4 सड़क का निर्माण अभी भी अधूरा है। यह सड़क नए बस स्टेशन से नहीं जुड़ पाई है।

शहर को ट्रैफिक की समस्या से मुक्त करने का दावा भाजपा परिषद ने किया था, लेकिन ट्रैफिक की समस्या अब भी बनी हुई है।

 

भविष्य को ध्यान में रखकर योजना बनाई

भाजपा परिषद ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाई हैं और उन पर काम शुरू किया है। नर्मदा के चौथे चरण के आने से अगले 15 वर्षों तक शहर में पानी की समस्या नहीं रहेगी। इसके अलावा सीवरेज और नई पाइपलाइन बिछाने के काम भी तेजी से किए गए हैं। ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सड़कों को चौड़ा किया गया है। - पुष्यमित्र भार्गव, महापौर

 

 

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