फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indore News: पूर्व प्रिंसिपल डॉ. रहमान को क्लीनचिट, कट्टरता फैलाने के आरोप से 3 साल बाद बरी हुए

Fri, 19 Dec 2025 07:28 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: शासकीय विधि महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. इनामुर्रहमान को मध्य प्रदेश शासन ने धार्मिक कट्टरता और पक्षपात के आरोपों से मुक्त कर दिया है। साल 2022 में एबीवीपी के विरोध के बाद उन पर एफआईआर दर्ज हुई थी और उन्हें निलंबित किया गया था। 
विज्ञापन
DAVV - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल, इंदौर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इंदौर के शासकीय विधि महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ. इनामुर्रहमान को तीन साल के लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग ने धार्मिक कट्टरता फैलाने के आरोपों से मुक्त कर दिया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और पुलिस केस के बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना था। उल्लेखनीय है कि डॉ. रहमान मई 2024 में अपनी सेवा से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
विज्ञापन


यह भी पढ़ें...
Indore News: तीन माह के बेटे की मां की दर्दनाक मौत, ट्रेन हादसे ने चौंकाया

एबीवीपी ने किया था विरोध
दिसंबर 2022 में इंदौर के सरकारी लॉ कॉलेज में उस समय तनाव की स्थिति बन गई थी जब एबीवीपी ने शिक्षकों पर कैंपस में धार्मिक कट्टरता और नफरत फैलाने के गंभीर आरोप लगाए थे। संगठन का दावा था कि कॉलेज की लाइब्रेरी में मौजूद एक विशेष पुस्तक 'सामूहिक हिंसा और दांडिक न्याय पद्धति' के माध्यम से छात्रों के बीच सांप्रदायिक विद्वेष पैदा किया जा रहा है। इस विरोध के बाद भंवरकुआं पुलिस ने तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रहमान और अन्य प्रोफेसरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
विज्ञापन




सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
इस मामले ने तब राजनीतिक तूल पकड़ा जब तत्कालीन गृह मंत्री ने आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए थे। हालांकि, मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जहां शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश शासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जाहिर की थी और डॉ. रहमान की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। अंततः न्यायालय ने पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को भी निरस्त कर दिया था।
विज्ञापन


विभाग द्वारा क्लीनचिट के मुख्य कारण
उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभागीय जांच समिति ने पाया कि डॉ. रहमान के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और दस्तावेजों का अभाव है। जांच में धार्मिक कट्टरता या पक्षपात के दावों की पुष्टि नहीं हो सकी। चूंकि डॉ. रहमान अब रिटायर्ड हो चुके हैं, इसलिए नियमानुसार उन्हें निलंबन अवधि के सभी आर्थिक लाभ और एरियर प्रदान किए जाएंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें