इंदौर में ट्रेंचिंग ग्राउंड में 3 करोड़ 5 लाख रुपये की लागत से शहर का पहला पशु शवदाह गृह तैयार किया जा रहा है। निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और अगले एक महीने के भीतर इसके पूरी तरह से चालू होने की संभावना है। इस परियोजना के शुरू होने के बाद नगर निगम एक निजी एजेंसी के सहयोग से शहरभर के मृत पशुओं का सम्मानजनक और वैज्ञानिक तरीके से अंतिम संस्कार कराएगा। इसके साथ ही, शहर के विभिन्न मीट और मटन मार्केट से निकलने वाले जैविक कचरे के निस्तारण की समस्या का भी स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
ट्रेंचिंग ग्राउंड में नगर निगम का बड़ा प्रोजेक्ट
नगर निगम ने ट्रेंचिंग ग्राउंड की खाली पड़ी जमीन पर इस वृहद परियोजना को आकार दिया है। इससे पहले निगम ने इस परिसर के विभिन्न हिस्सों में कचरा प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए थे और शहर से पकड़े जाने वाले आवारा श्वानों के लिए शेल्टर होम बनाने की योजना भी प्रस्तावित की है जिसके लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इसी परिसर के एक हिस्से में पशु शवदाह गृह का निर्माण किया गया है। निगम अधिकारियों के अनुसार, बुनियादी ढांचे का निर्माण नगर निगम द्वारा पूरा किया गया है, जबकि इसके दैनिक संचालन और प्रबंधन का जिम्मा एक अधिकृत निजी एजेंसी संभालेगी।
सार्वजनिक सूचना और हेल्पलाइन नंबर होंगे जारी
अब तक शहर में मृत पशुओं के निस्तारण के लिए कोई निर्धारित स्थान नहीं होने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था और अक्सर शवों को खुले में फेंक दिया जाता था। इस समस्या को खत्म करने के लिए नगर निगम सभी जोनल कार्यालयों और शहर के मुख्य चौराहों पर सूचना बोर्ड लगाएगा। इन बोर्डों पर हेल्पलाइन नंबर दर्ज होंगे, जिन पर नागरिक कॉल करके मृत पशुओं की सूचना दे सकेंगे। सूचना मिलते ही संबंधित एजेंसी की टीम विशेष वाहन के साथ मौके पर पहुंचेगी और मृत शरीर को सम्मानपूर्वक उठाकर ट्रेंचिंग ग्राउंड लाकर अंतिम संस्कार करेगी।
मीट मार्केट के कचरे का भस्मक में होगा निपटान
पशु शवदाह गृह में स्थापित भस्मक का उपयोग केवल पशुओं के अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं रहेगा। इसका उपयोग शहरभर के मटन, चिकन और मछली बाजारों से रोज निकलने वाले कचरे को जलाने और नष्ट करने के लिए भी किया जाएगा। वर्तमान में इन बाजारों के कचरे को खुले में फेंकने से कई बार विवाद और गंदगी की स्थिति पैदा होती है। हालांकि निगम की गाड़ियां यह कचरा उठाती हैं, लेकिन अब तक इसके निस्तारण की ठोस व्यवस्था नहीं थी। नए भस्मक के शुरू होने से इस कचरे का भी हवा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना निपटारा संभव हो सकेगा।