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Indore: मासूम बेटी के लिए कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक फैसला, पिता को तिहरे आजीवन कारावास की कठोर सजा

Sat, 20 Sep 2025 02:59 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: इंदौर जिला कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में अपनी ही 12 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म करने वाले पिता को तिहरे आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है। 
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दुष्कर्म।
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विस्तार
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इंदौर जिला कोर्ट ने मानवता को शर्मसार करने वाले एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपनी ही 12 वर्षीय मासूम बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले एक कलयुगी पिता को तिहरे आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपी ने पिता-पुत्री जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित किया है, इसलिए उसके लिए न्यूनतम दंड किसी भी तरह से विधिपूर्ण नहीं होगा और ऐसे अपराधियों पर कोई दया नहीं की जानी चाहिए।
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तलाक के बाद पिता के साथ रह रही थी मासूम
मामले की जानकारी के अनुसार, पीड़िता की मां ने 21 जुलाई 2024 को पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि उसका विवाह 2012 में आरोपी से हुआ था और उनके दो बच्चे, एक 12 वर्षीय बेटी (पीड़िता) और एक 6 वर्षीय बेटा, हैं। वर्ष 2020 में दोनों के बीच तलाक हो गया था, जिसके बाद अदालत के निर्णय अनुसार बेटी पिता के साथ और बेटा माँ के साथ रहने लगा था।



अकेले में पिता करता था घिनौनी हरकत
घटना का खुलासा तब हुआ जब 21 जुलाई 2024 को बालिका रोते हुए अपनी मुंहबोली मौसी के घर पहुंची और अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि जब भी वह घर पर अकेली होती थी, तो उसके पिता उसके साथ कई बार गलत काम करते थे। यह घिनौनी हरकत पहली बार दो साल पहले हुई थी और हाल ही में 15 दिन पहले भी पिता ने दोबारा उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने यह भी बताया कि उसने दो-तीन बार अपनी दादी को इस बारे में बताने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।
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मुंहबोली मौसी बनी सहारा, ऐसे दर्ज हुआ केस
दादी से मदद न मिलने पर बच्ची ने पड़ोस में रहने वाली अपनी मुंहबोली मौसी को पूरी घटना बताई। मौसी ने तुरंत पीड़िता की नानी को फोन पर सूचित किया। इसके बाद नानी ने अपनी बेटी (बालिका की मां) को बुलाया और सभी मिलकर थाने पहुँचे, जहाँ आरोपी पिता के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मुंहबोली मौसी के बयान सबसे अहम और मजबूत साक्ष्य साबित हुए, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए यह कठोर दंड सुनाया गया।
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बालिका को 3 लाख रुपए भी दिलाने का भी आदेश
प्रभारी डीपीओ राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि जिला अदालत ने 18 सितंबर 2025 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरोपी को पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6, 5(एन)/6 और 5(एम)/10 में दोषी पाते हुए तीन अलग-अलग आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 15 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुशीला राठौर ने पैरवी की। पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत बालिका को शारीरिक व मानसिक क्षति को देखते हुए 3 लाख रुपए दिलाने की अनुशंसा भी की है।
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