Indore News : आउटर रिंग रोड के लिए किए जा रहे सर्वे का ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया, जिसके चलते टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा। किसानों ने सोशल मीडिया के जरिये एकजुट होकर जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया है।
इंदौर में बनने वाली आउटर रिंग रोड और अहिल्या पथ जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी की टीम सर्वे करने विभिन्न गांवों में पहुंच रही है, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण सर्वे का कार्य शुरू ही नहीं हो पा रहा है। कल सोमवार को जब अधिकारी ललेदीपुरा, मोहना और नाहरखेड़ा गांव पहुंचे, तो वहां पहले से ही विरोध के लिए किसान और ग्रामीण एकत्रित थे। लगभग दो घंटे तक ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया, जिसके बाद सर्वे टीम को बिना कोई काम किए वापस लौटना पड़ा। मंगलवार को भी किसानों का जगह जह प्रदर्शन चलता रहा और सर्वे का काम रुका रहा।
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इससे पहले भी मोहना गांव में अधिकारी सर्वे के लिए गए थे, लेकिन विरोध के कारण वे वहां से लौटने को मजबूर हो गए थे। इस बार जिला प्रशासन और पुलिस बल के साथ टीम पहुंची थी, लेकिन किसानों की नाराजगी के आगे वे भी कुछ नहीं कर सके। ग्रामीणों का कहना है कि बिना उनकी सहमति के भूमि अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा।
सोशल मीडिया बना किसानों का हथियार
आउटर रिंग रोड से प्रभावित होने वाले गांवों के किसानों ने सोशल मीडिया पर अपना एक ग्रुप बना लिया है, जिसमें वे लगातार जानकारी साझा कर रहे हैं। जैसे ही किसी गांव में सर्वे टीम पहुंचती है, तुरंत अन्य गांवों के किसानों को सूचित कर दिया जाता है, जिससे आस-पास के ग्रामीण भी विरोध करने के लिए वहां पहुंच जाते हैं। इस एकजुटता के कारण सर्वे टीम हर बार असहाय महसूस कर रही है और अब तक सर्वे का कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पाया है।
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भारतीय किसान संघ ने किया विरोध तेज, 27 को धरना
भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों के आंदोलन को अब भारतीय किसान संघ का भी समर्थन मिल रहा है। संघ ने 27 फरवरी को कलेक्टर कार्यालय पर धरना देने की घोषणा की है, जिसमें आउटर रिंग रोड से प्रभावित सभी गांवों के किसान शामिल होंगे। किसानों का आरोप है कि नाममात्र की कीमत देकर उनकी उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है, जिससे उनका जीवनयापन प्रभावित होगा। सोमवार को भारतीय किसान संघ ने मालवा प्रांत की 112 तहसीलों में ज्ञापन सौंपा, जिसमें सरकार से मांग की गई है कि भूमि अधिग्रहण से पहले जमीन की कीमत बढ़ाई जाए और किसानों को बाजार मूल्य से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाए। जब तक उचित मुआवजा तय नहीं किया जाता, तब तक किसी भी तरह का भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
किसानों का संकल्प: जमीन नहीं देंगे
किसानों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे किसी भी हालत में अपनी जमीन सरकार को नहीं देंगे। विरोध बढ़ता देख अब प्रशासन के लिए यह चुनौती बन चुका है कि विकास परियोजनाओं को आगे कैसे बढ़ाया जाए। किसानों के तीव्र विरोध के चलते आउटर रिंग रोड और अन्य योजनाओं के कार्यों में देरी होने की संभावना बढ़ गई है।