पारंपरिक डोल ग्यारस पर्व पर आज इंदौर शहर में भव्य चल समारोह निकलेंगे। राधा-कृष्ण के सजे-धजे डोल विभिन्न समाजों और मंदिरों से सड़कों पर घूमते हुए दिखाई देंगे। राजबाड़ा से लेकर हरसिद्धि तक देर रात तक उत्साह और भक्ति का वातावरण रहेगा।
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फूलों से सजे डोल और झिलमिलाती झांकियां
सायंकालीन कार्यक्रम के दौरान फूलों से सजे डोल में राधा-कृष्ण को विराजित किया जाएगा। इसके साथ ही झिलमिलाती झांकियां, ढोल-बाजे और बैंड चल समारोह की शोभा बढ़ाएंगे। अखाड़ों के पहलवान करतब दिखाते हुए भी शामिल होंगे। यह परंपरा होलकर रियासत के समय से चली आ रही है और अब विभिन्न समाजों द्वारा संचालित की जाती है। डोल ग्यारस, जिसे जलझूलनी एकादशी भी कहा जाता है, पर श्रीकृष्ण और वामन अवतार की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
समाजों और मंदिरों के डोल होंगे आकर्षण का केंद्र
शहर में जूनी इंदौर, ग्वालटोली और मिल क्षेत्र से सबसे अधिक डोल निकलेंगे। इनमें सबसे प्राचीन डोल गोपाल मंदिर से निकलेगा।
अशोक नगर, कुमावतपुरा जूनी इंदौर, सुखलिया, चारभुजा मंडल, पालीवाल समाज, बलाई समाज, कोष्टी समाज, सकलपंच फूलमाली समाज, श्री यादें प्रजापति समाज, राठौर समाज, कुशवाह समाज, नृसिंह मंदिर और चंद्रपाल व्यायामशाला से भी डोल निकाले जाएंगे।
बच्चों के लिए मोटू-पतलू की झांकी
इस बार बच्चों के लिए जय शिव जिम्नेशियम द्वारा खास आकर्षण तैयार किया गया है। मोटू-पतलू की झांकी चल समारोह में विशेष रूप से दिखाई जाएगी, जिसमें लकड़ी की काठी, काठी पे घोड़ा गीत बजेगा। आयोजक सन्नी राजू चौहान ने बताया कि राजकमल बैंड द्वारा भजनों की विशेष प्रस्तुति भी दी जाएगी।
यह रहेगा मार्ग
चल समारोह शाम 8 बजे सुभाष मार्ग से शुरू होगा। यह बड़वाली चौकी, अहिल्यापुरा, खजूरी बाजार होते हुए राजबाड़ा से हरसिद्धि मंदिर तक पहुंचेगा और वहीं इसका समापन होगा।
झांकियों की तैयारी भी अंतिम चरण में
अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली झांकियों की तैयारी भी अंतिम चरण में चल रही है। मिलों में बन रही झांकियां भी लगभग पूरी हो चुकी हैं। लगतार हो रही बारिश के बीच भी झांकियों का काम अनवरत जारी है। शहर के लोग भी झांकियों का निर्माण देखने के लिए पहुंचने लगे हैं।