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Indore News: 218 करोड़ की डील के बाद भी नगर निगम को नहीं मिला एक भी रुपया

Wed, 02 Apr 2025 07:21 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला ,इंदौर

सार

Indore News: हुकमचंद मिल की जमीन को 218 करोड़ में बेचने के बावजूद नगर निगम को कोई सीधा वित्तीय लाभ नहीं हुआ। गृह निर्माण मंडल के साथ हुए करार के तहत यह राशि मजदूरों के भुगतान में समाहित हो गई।
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Indore News - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
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हुकमचंद मिल की जमीन की रजिस्ट्री के मामले में नगर निगम को आर्थिक रूप से कोई सीधा लाभ नहीं हुआ है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, नगर निगम ने इस जमीन को मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना मंडल को 218 करोड़ रुपए में बेचा है। लेकिन यह बिक्री मात्र कागजों तक ही सीमित रही, क्योंकि इस रजिस्ट्री के बावजूद निगम को एक भी रुपया प्राप्त नहीं हुआ। यह मामला नगर निगम के लिए एक जटिल वित्तीय प्रक्रिया का हिस्सा बन गया है, जिसमें सीधे तौर पर किसी प्रकार की राजस्व प्राप्ति नहीं हुई।  
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रजिस्ट्री की प्रक्रिया और जमीन की कीमत
हाल ही में नगर निगम ने हुकमचंद मिल की 17.9 हेक्टेयर जमीन में से 17.5 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री गृह निर्माण मंडल के नाम कराई। यह रजिस्ट्री 22.45 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से कराई गई। पंजीकृत दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यह जमीन 218 करोड़ रुपए में बेची गई है। लेकिन नगर निगम को इस सौदे के परिणामस्वरूप कोई सीधा वित्तीय लाभ नहीं हुआ, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर निगम की इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं हो रही हैं।  
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गृह निर्माण मंडल और नगर निगम के बीच हुआ समझौता 
इस मामले में जब नगर निगम की अपर आयुक्त लता अग्रवाल से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि नगर निगम और गृह निर्माण मंडल के बीच पहले ही एक समझौता हो चुका था। इस समझौते के तहत, गृह निर्माण मंडल द्वारा हुकमचंद मिल के श्रमिकों की बकाया राशि, जो करीब 400 करोड़ रुपए थी, का भुगतान किया जाना था। इस करार के अनुसार, मिल की जमीन पर एक बड़ा प्रोजेक्ट विकसित किया जाएगा, जिसमें गृह निर्माण मंडल और नगर निगम दोनों की साझेदारी होगी। इस समझौते के तहत ही जमीन की रजिस्ट्री गृह निर्माण मंडल के नाम की गई।  
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मजदूरों की बकाया राशि और नगर निगम की हिस्सेदारी 
नगर निगम का तर्क है कि रजिस्ट्री में जो 218 करोड़ रुपए का मूल्य दर्शाया गया है, वह असल में मिल के मजदूरों को चुकाए गए भुगतान में निगम की हिस्सेदारी के रूप में जोड़ा गया है। इसका मतलब यह है कि जमीन की बिक्री से प्राप्त राशि सीधे मजदूरों के भुगतान के लिए इस्तेमाल हो गई, जिससे नगर निगम को कोई अलग से धनराशि प्राप्त नहीं हुई। इस पूरे प्रकरण ने नगर निगम के वित्तीय हितों को एक अलग दिशा में मोड़ दिया है, जिससे नगर निगम को तत्काल कोई आर्थिक लाभ नहीं हो सका।
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