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Indore News: हुकमचंद मिल की 42 एकड़ जमीन निगम ने सौंपी हाऊसिंग बोर्ड को, बनेगा आईटी पार्क

Tue, 05 Dec 2023 05:30 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

हाईकोर्ट के आदेश पर हाऊसिंग बोर्ड 425 करोड़ रुपयेे बैंक खाते में जमा कर चुका है। उसमें से 218 करोड़ रुपये मजदूरों व उनके परिवारों को मिलेंगे। शेष राशि बैंक व अन्य देनदारों को दी जाएगी।
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श्रमिकों का मुंह मीठा करते मेयर भार्गव - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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बंद हो चुके हुकमचंद मिल की जमीन को नगर निगम ने एमपी हाऊसिंग बोर्ड को हस्तांतरित कर दिया है। इसके लिए मंगलवार को नगर निगम का विशेष परिषद सम्मेलन आयोजित किया गया था। जिसमें पार्षदों ध्वनि मत से जमीन बोर्ड को देने के प्रस्ताव पर सहमति दी। अब बोर्ड मिल श्रमिक व अन्य बकायदारों की देनदारियां निपटाकर 42 एकड़ जमीन पर आईटी पार्क बनाएगा।

हाईकोर्ट के आदेश पर हाऊसिंग बोर्ड 425 करोड़ रुपयेे बैंक खाते में जमा कर चुका है। उसमें से 218 करोड़ रुपये मजदूरों व उनके परिवारों को मिलेंगे। शेष राशि बैंक व अन्य देनदारों को दी जाएगी। मंगलवार को विशेष सम्मेलन में नगर निगम ने यह जमीन हाउसिंग बोर्ड को देने की मंजूरी दे दी है। अब इस जमीन की रजिस्ट्री व नामांतरण कराने के बाद बोर्ड अपना प्रोजेक्ट लाएगा।

सम्मेलन में मिल श्रमिक भी पहुंचे। उनका मेयर पुष्यमित्र भार्गव व विधायक रमेश मेंदौला ने मिठाई खिलाकर मुंह मीठा किया। इस मौके पर मेयर भार्गव ने कहा कि निगम चाह रहा था कि श्रमिकों को उनके हक का पैसा जल्द से जल्द मिल सके। कई श्रमिकों की मौत हो चुकी है और उनके परिवार आर्थिक तंगी झेल रहे है, इसलिए अाचार संहिता समाप्त होते ही हमने सम्मेलन आयोजित किया। अब जल्दी ही श्रमिकों के खाते में पैसा जाएगा।

आपको बता दें कि 32 साल पहले 12 दिसंबर को मिल अचानक बंद हो गया था। इसके बाद श्रमिकों ने आंदोलन किए थे। मिल प्रबंधन ने श्रमिकों का भुगतान भी नहीं किया था। मिल की जमीन बेचकर देनदारियां निपटाने की कोशिश भी हुई, लेकिन जमीन नहीं बिक रही थी। बाद में सरकार ने लीज निरस्त कर जमीन का कब्जा नगर निगम को सौंपा था।

लैंडयूज बदलने के बाद निगम को सौंपी जमीन

बाद मेें सरकार ने हुकमचंद मिल की जमीन नगर निगम को सौंप दी और श्रमिकों को 50 करोड़ का भुगतान करने के लिए कहा। नगर निगम ने हाऊसिंग बोर्ड के साथ अनुबंध किया और जमीन पर वह नया प्रोजेक्ट लाने के लिए राजी हो गया। पहले मिल की जमीन का लैंडयूज अौद्योगिक था। बाद में उसे बदलकर व्यापारिक व आवासीय किया गया।

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