इंदौर में भिक्षावृत्ति पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध के बावजूद शहर के विभिन्न स्थलों जैसे ट्रैफिक सिग्नल, मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति की गतिविधियां जारी हैं। इस स्थिति को देखते हुए कलेक्टर आशीष सिंह ने सोमवार को एक बार फिर सख्त आदेश जारी किया। उन्होंने नागरिकों को भिक्षावृत्ति से संबंधित किसी भी घटना की सूचना देने के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराया है। अब तक इंदौर प्रशासन द्वारा 354 भिखारियों को रेस्क्यू कर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा जा चुका है। इसके अलावा, 45 बच्चों को बाल सुधार गृह में भेजा गया है ताकि उन्हें उचित देखभाल और सुरक्षा दी जा सके।
अपराधों को बढ़ावा दिया जा रहा
कलेक्टर आशीष सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि शहर के ट्रैफिक सिग्नल, चौराहे, धार्मिक स्थलों, पर्यटन स्थलों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अभी भी भिक्षावृत्ति की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भिक्षावृत्ति की आड़ में कई आपराधिक तत्व सक्रिय हो जाते हैं, जिससे अपराधों को बढ़ावा मिलता है।
हेल्पलाइन नंबर जारी किया
कलेक्टर ने कहा कि भिक्षावृत्ति के माध्यम से कई बार नशाखोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसे पूरी तरह रोकने के लिए भारतीय नागरिक अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के तहत इंदौर में किसी भी प्रकार से भीख लेना, देना या भिक्षा स्वरूप कोई सामान देना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है। इस नियम का उल्लंघन करने पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शहरवासियों को इस मुद्दे पर जागरूक करते हुए कलेक्टर ने भिक्षावृत्ति से संबंधित किसी भी घटना की शिकायत के लिए संपर्क नंबर जारी किया है। यदि कोई व्यक्ति भिक्षावृत्ति करता हुआ या भिक्षा देता हुआ नजर आए, तो उसकी शिकायत महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा को 9691494951 पर की जा सकती है।