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Indore News: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से जताई चिंता, यह 2 चीजें बन रही साइलेंट किलर

Sat, 04 Oct 2025 06:40 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

सार

Indore News: नेशनल कार्डियो प्रिवेंट कॉन्फ्रेंस का फोकस युवाओं में बढ़ते हृदय रोगों के कारण जैसे मोटापा, प्रदूषण और अस्वस्थ जीवनशैली पर रहा। विशेषज्ञों ने बचाव के लिए समय पर स्वास्थ्य जांच, सही आहार और सक्रिय दिनचर्या को मूलमंत्र बताया।
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मंत्री विजयवर्गीय को सम्मानित किया गया। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
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कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (CSI) इंदौर चैप्टर द्वारा आयोजित दो दिवसीय छठी नेशनल कार्डियो प्रिवेन्ट कॉन्फ्रेंस का पहला दिन हृदय रोगों की बढ़ती संख्या एवं रोगों के विभिन्न कारणों की खोज पर आधारित रहा। “रोड टू द हेल्दी हार्ट” थीम पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के 350 से अधिक कार्डियोलॉजिस्ट, हेल्थ एक्सपर्ट और रिसर्चर्स ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ मुख्य संयोजक एवं साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. ए. के. पंचोलिया के स्वागत भाषण से हुआ। इस अवसर पर केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, प्रो. संजय त्यागी, डॉ. धिमन काहली और डॉ. विद्युत जैन समेत क्षेत्र के जाने माने डॉक्टर्स उपस्थित रहे।
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दिल की बीमारियों से बचाएंगे ये उपाय
पहले दिन आयोजित विभिन्न वैज्ञानिक सत्रों में हाइपरटेंशन, मोटापा, डायबिटीज, कार्डियक इमेजिंग, वरिष्ठ नागरिकों की हार्ट केयर गाइडलाइन्स और लाइफस्टाइल डिसीज प्रिवेंशन जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने लेटेस्ट रिसर्च के साथ अपने क्लिनिकल अनुभव साझा किए। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन सभी वक्ताओं ने एकमत से कहा कि हृदय रोगों से बचाव केवल दवाओं से नहीं, बल्कि “समय पर जागरूकता, सही आहार और सक्रिय जीवनशैली” से संभव है। नेशनल कार्डियो प्रिवेन्ट कॉन्फ्रेंस का दूसरा दिन रविवार, 5 अक्टूबर को आयोजित होगा, जिसमें जन-जागरूकता कार्यक्रम और विशेष पैनल चर्चा का आयोजन किया जाएगा।
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विजयवर्गीय बोले यह चिंता का विषय
इंदौर में "कार्डियो प्रिवेंट 2025" के शुभारंभ अवसर पर स्वस्थ जीवन के महत्व पर केबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने विचार साझा किए और कहा "यह वास्तव में चिन्ता का विषय है कि हृदय रोग आज हमारे जीवन का सबसे बड़ा शत्रु बनता जा रहा है। जिस समाज की धड़कनें ही अस्वस्थ हों, वहां समृद्धि और सुख की कल्पना अधूरी रह जाती है। ऐसे समय में कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया की दो दिवसीय पहल “कार्डियो प्रिवेंट कॉन्फ्रेंस” निस्संदेह प्रेरणा देने वाला संकल्प है। यह जनमानस के जीवन को दीर्घ, स्वस्थ और संतुलित बनाने का अभियान है।"

काम के बीच में ब्रेक लें
मुख्य संयोजक एवं साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. ए. के. पंचोलिया ने कहा कि 20–22 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना चाहिए, जिससे कार्डियक अरेस्ट के खतरे कम किए जा सकें। ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम और अन्य सरकारी कर्मियों को CPR जैसी बचाव की बुनियादी तकनीकें सीखनी चाहिए ताकि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की जान बचाई जा सके। व्यक्ति को अपनी सीमाएं जाननी चाहिए और काम के साथ अपने स्वास्थ्य का संतुलन बनाए रखना चाहिए। खुश रहना भी उतना ही जरूरी है। युवाओं में उच्च रक्तचाप की समस्या बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर लंबा समय बिताना है और यह कार्डियक अरेस्ट का जोखिम बढ़ाता है। काम के बीच ब्रेक लेना और खुद को तरोताजा रखना आवश्यक है। अमेरिका की तरह भारत में भी नियमित स्वास्थ्य जांच की आदत डालना बहुत लाभकारी है।"

प्रदूषण से बढ़ रही बीमारियां
ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. विद्युत जैन ने कहा कि मोटापा और प्रदूषण इस बार प्रमुख विषय रहे। भारत में प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक है, जो बढ़ते हार्ट अटैक का एक मुख्य कारण बन रहा है। मोटापे का कारण कम शारीरिक गतिविधि, अस्वस्थ जीवनशैली और बाहर का खाना अधिक सेवन करना है लेकिन अब नए उपचार उपलब्ध हैं, जिनसे मोटापे को लंबे समय तक कम किया जा सकता है। इसके अलावा हृदय रोग अब केवल बुज़ुर्गों की नहीं, बल्कि युवाओं की भी गंभीर समस्या बन चुका है। समय पर जांच, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली ही हृदय रोगों से सुरक्षा का मूलमंत्र है।
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यह प्रमुख कारण
ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राकेश जैन ने बताया कि 350 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हृदय विशेषज्ञों के साथ यह कॉन्फ़्रेन्स दो साल बाद इंदौर में आयोजित हुई है। युवाओं में कार्डियक अरेस्ट के मुख्य कारण स्मोकिंग, कोलेस्ट्रॉल, जीवनशैली बदलाव और आनुवंशिक कारक हैं। कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों तक हार्ट हेल्थ और बचाव उपायों के बारे में जागरूकता पहुंचाना है। 30–35 साल की उम्र में होने वाले हार्ट अटैक का मुख्य कारण अनियमित हृदय धड़कन है। दिल्ली से आए वरिष्ठ डॉक्टर डॉ. प्रभाकरण ने हार्ट अटैक के जोखिम और व्यक्तिगत बचाव उपायों पर भी चर्चा की। कॉन्फ्रेंस में कल सार्वजनिक संवाद सत्र भी होगा, जिसमें लोग अपने सवाल पूछ सकेंगे। अगर केवल 300 लोग भी आएं तो यह जानकारी हजारों लोगों तक पहुंचेगी।"
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