मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज इंदौर पहुंचे और कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने आज इंदौर को कई बड़ी सौगातें भी दी। वे आपातकाल की विभीषिका पर ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित संगोष्ठी में शामिल हुए। इससे पहले उन्होंने वरिष्ठ नागरिक भवन 'स्नेह धाम' का लोकार्पण किया और 381 करोड़ की लागत से पूरे होने वाले विकास कार्यों का शिलान्यास भी किया।
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स्नेह धाम में कई सुविधाएं
वृद्धजनों के लिए तैयार इस स्नेह धाम में कई सुविधाएं होंगी। 6 मंजिला इस भवन में पुस्तकालय होगा, जिसमें धार्मिक एवं अन्य पुस्तकें पढ़ने को मिलेंगी। इसका निर्माण इंदौर विकास प्राधिकरण ने किया है और 16 करोड़ रुपए की लागत से इसमें 32 फ्लैट बनवाए गए हैं। जिनमें वृद्धजन रहेंगे। बताया गया कि इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित यह “स्नेहधाम” भवन न केवल प्रदेश का पहला है, बल्कि अपने तरह की एक प्रेरणादायी और मानवीय पहल भी है, जो वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन के उत्तरार्ध में सम्मान, सुविधा और सुरक्षा प्रदान करेगा।
565 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोकार्पण अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में इंदौर को 565 करोड़ रुपये से अधिक के लागत के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने इस मौके पर लगभग 90 करोड़ रुपये लागत के विकास कार्यों का लोकार्पण किया और 476 करोड़ रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का शिलान्यास किया। एमआर-11 की मास्टर प्लान की रोड के अलावा योजना 136 में बनाई जाने वाली 100 करोड़ की बिल्डिंग सहित टीपीएस योजनाओं के कई विकास कार्य और पानी की टंकियों के निर्माण का शिलान्यास किया। प्राधिकरण द्वारा टीपीएस-4 में रोड और क्रश बैरियर का निर्माण, मास्टर प्लान की सड़क, बिजली के सब स्टेशनों के निर्माण, योजना 166 में विद्युतीकरण, टीपीएस-10 में ग्राम बांगड़दा, पाल कांकरिया, टिगरिया बादशाह में विकास कार्य के अलावा योजना 151 और 169बी में 21 मीटर ऊंची पानी की टंकियों का निर्माण भी कराया जा रहा है।
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आपातकाल के विरुद्ध लड़ाई देश के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई थी
देश में आपातकाल लागू होने की 50 वीं वर्षगांठ को बुधवार को "संविधान हत्या दिवस" के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में "आपातकाल विभीषिका" विषय पर आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि आपातकाल के विरुद्ध लड़ाई, देश के लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई थी।आपातकाल के दौरान न्यायालयों के फैसलों को पलट दिया गया। आपातकाल देश के लोकतंत्र पर काले धब्बे के समान था। उन्होंने कहा कि आज से 50 वर्ष पूर्व 25 जून 1975 को जिन लोगों ने देश में आपात काल लागू किया था, वे ही इस कलंक के लिए जिम्मेदार हैं और वे कभी भी इस कलंक से मुक्त नहीं हो सकते हैं। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई और विधायक महेंद्र हार्डिया सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। उस दौर में हजारों निरपराध लोगों को जेलों में बंद कर दिया गया है। आपातकाल में लोगों पर बेइंतहा अत्याचार किए गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के योगदान का स्मरण भी किया।
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राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आपातकाल के विरुद्ध लड़ाई देश की आजादी की दूसरी लड़ाई थी। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान किसी की भी संपत्ति जब्त की जा सकती थी। आपातकाल के दौरान लोकसभा का कार्यकाल बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया था तथा संसद की बैठक के लिए कोरम की व्यवस्था समाप्त कर दी गई थी। राज्यसभा सांसद त्रिवेदी ने इस अवसर पर कहा कि आपातकाल में विधायिका, कार्यपालिका और न्याय पालिका के साथ साथ मीडिया पर भी नियंत्रण किया गया था। उन्होंने कहा देश में वास्तविक लोकतंत्र आपातकाल की समाप्ति के बाद ही लागू हुआ है। देश में वैचारिक स्वतंत्रता पाने की लड़ाई आज भी जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हमें "आत्म गौरव" का आभास होने लगा है। प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री अजय विश्नोई ने इस अवसर पर आपातकाल में अपनी जेल यात्रा के अनुभव सुनाए। उन्होंने बताया कि 25 जून की रात में ही देश में सभी विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार कर जेल भी दिया गया था।
कांग्रेस में आपातकाल ला रहे राहुल गांधी
आपातकाल की 50वीं बरसी के अवसर पर बुधवार को राज्यसभा सदस्य एवं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने इंदौर के ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में मीडिया से चर्चा की। उन्होंने इसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। त्रिवेदी ने कहा कि 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी ने देश के लोकतंत्र की हत्या की थी, जिसे नई पीढ़ी को भूलना नहीं चाहिए। हम इसी दुखद और कलंकित अध्याय का स्मरण करने यहां उपस्थित हुए हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा जी देश के लिए इमरजेंसी लेकर आई थीं, राहुल गांधी कांग्रेस के लिए इमरजेंसी लेकर आए हैं। कांग्रेस में नेताओं के हाल यह हैं कि अगर कोई वहा सच बोलता है तो उस नेता को वहां नोटिस नहीं दिया जाता है इसे पार्टी से निष्कासित कर दिया जाता है।