डॉ. जैन
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के प्रति देशवासियों के दिलों में श्रद्धा और सम्मान जाग्रत करने के लिए इंदौर के शिक्षाविद डॉ. अरविंद जैन (रंजन सर) पिछले 35 वर्षों से लगातार तिरंगा वंदना कर रहे हैं। अब तक वे इंदौर सहित प्रदेश और देशभर में 7 हजार से अधिक तिरंगा वंदना कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं।
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चार मिनट की वंदना में कई सीखें
इन कार्यक्रमों में बच्चों से लेकर युवा, महिलाएं और वरिष्ठजन बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। मात्र चार मिनट की इस वंदना में सरस्वती वंदना के साथ राष्ट्र वंदना भी की जाती है। डॉ. जैन विशेष रूप से जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताओं, शपथ विधि समारोह जैसे अवसरों पर तिरंगा वंदना कराते हैं। कार्यक्रम में सबसे पहले मंच पर तिरंगा स्टैंड लगाया जाता है, जिसके बाद सभी उपस्थितजन अनुशासनपूर्वक वंदना में शामिल होते हैं। तिरंगा वंदना में यह शपथ ली जाती है "हम हमारे राष्ट्र ध्वज का वंदन करते हैं और इसके प्रति अपनी निष्ठा भावना की शपथ लेते हैं। इसका यश और गौरव हमारे लगन और श्रमपूर्वक जीवन पर निर्भर है, जो कि एक अच्छे नागरिक के कर्तव्य बोध से बंधा है।" इसके साथ वे "या देवी सर्वभूतेषु..." और "ऊँ सरस्वत्यै नम:" का उच्चारण भी करते हैं। वंदना का समापन राष्ट्रगान "जन गण मन" के संपूर्ण गान के साथ होता है।
राष्ट्र प्रथम की भावना जागृत कर रहे
डॉ. जैन के अनुसार, तिरंगा वंदना का मुख्य उद्देश्य "राष्ट्र प्रथम" की भावना को मजबूत करना है। उनका मानना है कि राष्ट्रीय ध्वज हमारी आन-बान-शान का प्रतीक है और उसकी वंदना करना हर भारतीय का कर्तव्य है। यह वंदना देश के प्रति कर्तव्यों की शपथ भी है, जो मन में राष्ट्र के प्रति श्रद्धा और उत्साह का संचार करती है।
युवाओं को सही दिशा दिखाई
आज के दौर में, जब युवा मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, ऐसे समय में तिरंगा वंदना की अहमियत और बढ़ जाती है। डॉ. जैन कहते हैं कि रोजाना सिर्फ चार मिनट देकर कोई भी व्यक्ति इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकता है। इसके लिए केवल एक तिरंगा और स्टैंड की जरूरत होती है। यह सरल पहल युवाओं के दिलों में देशभक्ति की अलख जगाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। कई युवाओं का इससे जीवन बदला है और वे नशे और मोबाइल एडिक्शन से दूर हुए हैं। उन्हें एक अच्छा समूह मिला है जहां पर वह कुछ नया सीखते हैं और देश के लिए नए नए कार्यक्रमों के माध्यम से खुद में भी सुधार लाते हैं।