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Indore News: इंदौर की होप टेक्सटाइल मिल की 22 एकड़ जमीन का प्रशासन ने लिया कब्जा, एक हजार करोड़ है कीमत

Thu, 21 Aug 2025 04:12 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

गुरुवार को कब्जा लेने के लिए टीम भी मौके पर जा पहुंची। जमीन की नप्ती लेने के बाद बोर्ड लगा दिया गया है। इस जमीन के चार एकड़ हिस्से में जिला कोर्ट के वाहनों की पार्किंग की जा रही है,क्योकि जिला कोर्ट में वाहनों की पार्किंग की समस्या रहती है। 
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होप मिल की जमीन का कब्जा लिया। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर के बरसों पुराने होप टेक्सटाइल मिल की 22 एकड़ जमीन का कब्जा प्रशासन की टीम ने गुरुवार को लिया।  प्रशासन ने इसकी लीज निरस्त कर दी।शासन के स्वामित्व वाला बोर्ड भी लगा दिया। शहर के मध्य हिस्से में स्थित इस जमीन का बाजार मूल्य एक हजार करोड़ रुपये है। 86 साल पहले 1939 मे होलकर स्टेट ने जमीन आवंटित की थी। यह जमीन जिला कोर्ट के पीछे स्थित है।

 

पिछले दिनों जमीन को लेकर प्रशासन ने नोटिस जारी किए थे, लेकिन प्रबंधन की तरफ से जवाब में कहा गया कि जमीन की लीज शासन द्वारा दी गई है। लीजधारक शासकीय पट्टेदार की श्रेणी में है, इस कारण उसके खिलाफ सुनवाई का अधिकार शासन या कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण बुधवार को कलेक्टर ने सर्वे नंबर 282/2 की 22 एकड़ जमीन की लीज निरस्त कर दी। अपने आदेश में कलेक्टर ने पूर्व में इस तरह के मामले में हुई कोर्ट निर्णय का हवाला भी दिया गया।   

 

गुरुवार को कब्जा लेने के लिए टीम भी मौके पर जा पहुंची। जमीन की नप्ती लेने के बाद बोर्ड लगा दिया गया है। इस जमीन के चार एकड़ हिस्से में जिला कोर्ट के वाहनों की पार्किंग की जा रही है,क्योकि जिला कोर्ट में वाहनों की पार्किंग की समस्या रहती है। इसके अलावा इस जमीन पर हर साल जत्रा महोत्सव भी आयोजित किया जाता है। होलकर स्टेट द्वारा जिस प्रायोजन को लेकर जमीन दी गई थी। प्रशासन ने माना कि उसके हिसाब से लीज का उल्लघंन हुआ है। इसके बाद होप टेक्सटाइल के प्रबंधक को नोटिस जारी किया गया था। मिल प्रबंधन ने अतिरिक्त भूमि पर न्यू सियागंज मार्केट भी बनाया है। अब माना जा रहा है कि लीज निरस्ती का मामला फिर कोर्ट में जा सकता है।

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वर्ष 2012 में हुई थी जमीन सरकारी घोषित

कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने वर्ष 2012 में यह जमीन सरकारी घोषित की थी। इसके बाद लीजधारी कांति बम ने कलेक्टर के आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी। कोर्ट ने आदेश को इस  आधार पर रद्द किया था कि कलेक्टर ने विधिवत सुनवाई नहीं की। लीजधारी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए। इस बार फिर लीज निरस्त की गई। कलेक्टर ने आदेश में लिखा है कि पूरी जमीन लीज पर दी गई थी,लेकिन लीज शर्तों का उल्लघंन करते हुए कुछ हिस्से को बेचा गया।

आपको बता दे कि कांति बम के बेटे अक्षय बम लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार थे, लेकिन उन्होंने नाम वापसी के अंतिम दिन नामांकन वापस ले लिया था। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से इंदौर संसदीय क्षेत्र में कोई उम्मीदवा नहीं था। इस वजह से शंकर लालवानी देश में सबसे ज्यादा वोटों से चुनाव लड़े है। होप मिल की लीज बम परिवार को दी गई थी।

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