इंदौर में हाल ही में 400 से अधिक आदिवासी होस्टलर्स की स्क्रीनिंग के दौरान 65 छात्रों में सिकल सेल एनीमिया के संदिग्ध लक्षण पाए गए हैं। इनकी रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि वास्तव में कितने लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। यह स्क्रीनिंग राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत की गई, जिसका उद्देश्य सिकल सेल एनीमिया को पहचानना और प्रभावितों को समय पर इलाज प्रदान करना है।
आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही गंभीर समस्या
एमवाय हॉस्पिटल की अलग-अलग टीमों ने इस जांच प्रक्रिया में आदिवासी होस्टलों में जाकर इन होस्टलर्स की सेहत से जुड़ी जानकारी इकट्ठा की और उनकी गहन जांच की। हॉस्पिटल सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही एक गंभीर समस्या है। इसी वजह से इस तरह की स्क्रीनिंग की जा रही है ताकि बीमारी को समय रहते पहचान कर इसका इलाज किया जा सके।
एनीमिया के 1400 मरीज रजिस्टर्ड
वर्तमान में एमवाय हॉस्पिटल में सिकल सेल एनीमिया के 1400 मरीज रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से ज्यादातर आलीराजपुर, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, झाबुआ और डिंडोरी जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों से आते हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही इन नए संदिग्ध मामलों की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा, जिससे इलाज की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।