मध्यप्रदेश के 71वें स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को इंदौर के राजेंद्र नगर स्थित लता मंगेशकर सभागृह में जिला स्तरीय मुख्य समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने प्रदेश के पिछले 70 साल के विकास सफर को याद करते हुए अपने बचपन से लेकर वर्तमान समय तक आए बदलावों का विस्तार से जिक्र किया।
मध्यप्रदेश और मेरी उम्र लगभग बराबर: कैलाश विजयवर्गीय
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश की स्थापना 1 नवंबर 1956 को हुई थी और उनका जन्म 13 मई 1956 को हुआ था। इस तरह मध्यप्रदेश और उनकी उम्र लगभग बराबर है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस प्रदेश को अपनी आंखों के सामने बदलते हुए देखा है। एक समय था जब मध्यप्रदेश की गिनती पिछड़े राज्यों में होती थी, लेकिन आज प्रदेश ने विकास के कई नए पड़ाव सफलतापूर्वक पार कर लिए हैं।
स्कूली दिनों की बदहाली और आज की आधुनिक व्यवस्थाएं
कैलाश विजयवर्गीय ने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए बताया कि जिस स्कूल में वे पढ़ने जाते थे, वहां दरवाजे और खिड़कियां तक नहीं थीं। रात में आवारा गायें आकर गोबर कर जाती थीं और कुछ लोग शराब पीकर बोतलें छोड़ जाते थे। सुबह स्कूल पहुंचने पर 4 बच्चों को पहले झाड़ू लगाकर सफाई करनी पड़ती थी, जिसके बाद ही पढ़ाई शुरू हो पाती थी। उस समय बैठने के लिए टाट-पट्टी तक नहीं होती थी और बच्चों को घर से टाट लाना पड़ता था। उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है और बच्चों को नि:शुल्क ड्रेस व किताबें मिल रही हैं।
इंदौर महापौर काल में शिक्षा सुधार के लिए उठाए कदम
उन्होंने बताया कि इंदौर का महापौर बनने के बाद उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार को अपनी पहली प्राथमिकता बनाया और इसके लिए शिक्षा उपकर लगाया। इस उपकर के माध्यम से शिक्षा के विकास के लिए बड़ी राशि जुटाई गई। उस दौर में लगभग 15 करोड़ रुपए स्कूलों की इमारतों व मूलभूत सुविधाओं के विकास पर खर्च करने की व्यवस्था की गई थी।
खस्ताहाल सड़कों से लेकर आधुनिक कनेक्टिविटी का सफर
सड़क और परिवहन क्षेत्र में आए बदलावों पर बात करते हुए कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता के रूप में जब उन्हें इंदौर और आसपास के क्षेत्रों का दौरा करना पड़ता था, तब नीमच से लौटने में ही 3 से 4 दिन लग जाते थे। सड़कें इतनी खराब थीं कि यात्रा के बाद पूरे शरीर में दर्द होने लगता था। आज स्थिति यह है कि सुबह धार, रतलाम, जावरा और मंदसौर का दौरा करके रात 11 से 12 बजे तक वापस घर लौटा जा सकता है, यही असली विकास है।
सिंचाई और कृषि क्षेत्र में हुआ अभूतपूर्व विकास
कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि वर्ष 2003 में जब वे पहली बार मंत्री बने थे, तब प्रदेश की कुल सिंचाई क्षमता केवल 7 लाख हेक्टेयर के आसपास थी। आज प्रदेश में 1 लाख किलोमीटर से अधिक लंबाई की पक्की सड़कों का निर्माण हो चुका है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से झाबुआ और धार जैसे आदिवासी क्षेत्रों में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां आदिवासी परिवार 1 फसल के बाद मजदूरी के लिए पलायन करते थे, वहीं अब नर्मदा जल पहुंचने से वे 2 फसलें ले पा रहे हैं।
विरासत के संरक्षण के साथ विकास की दिशा में बढ़ते कदम
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्यप्रदेश की पहचान इसकी सांस्कृतिक विविधता में निहित है। मालवा, महाकौशल, बुंदेलखंड, बघेलखंड और निमाड़ की अपनी अलग परंपराएं, भाषा और खान-पान हैं। उन्होंने महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए बताया कि उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे धार्मिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को लगातार बढ़ावा मिल रहा है।