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Indore: यूका के कचरे पर मंत्री विजयवर्गीय ने बुलाई बैठक, कहा-जनता डरे नहीं, रातभर हमने सरकार को सोने नहीं दिया

Fri, 03 Jan 2025 06:19 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

भोपाल गैस कांड के बाद यूनियन कार्बाइड के विषैले कचरे का निपटान इंदौर के पास पीथमपुर में किया जाना है। इसका विरोध शुरू हो रहा है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे लेकर बैठक आयोजित की, जिसमें शहर के लोगों के सवालों के जवाब जिम्मेदारों ने दिए हैं। 
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इंदौर में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक कर यूका के कचरे से संबंधित शंकाओं पर अफसरों से जवाब लिया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल से इंदौर आए 337 टन विषैले कचरे को लेकर जारी विरोध के बीच इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय की मौजूदगी में एक बैठक आयोजित की गई। उन्होंने कहा कि हमें भी शहर की चिंता है। रातभर हमने सरकार को सोने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि जहरीले कचरे से जनता भयग्रस्त न हो, शंका का समाधान जरूरी है। 
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विजयवर्गीय ने अफसरों से यह भी पूछा कि वर्ष 2015 में दस टन जहरीले कचरे को जलाया गया तो क्या पीथमपुर की जनता को जानकारी थी? जिसका अफसर कोई जवाब नहीं दे सके। आईएएस विवेक पोरवाल ने कहा कि पीथमपुर में दो बार कचरे का ट्रायल हो चुका है। फसल की उत्पादकता, पानी की जांच की गई। 17 जगहों पर बोर कर 37 मापदंडों पर परीक्षण किया गया। पानी दूषित नहीं पाया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जल्दबाजी नहीं की। पूरी प्रक्रिया अपनाई गई है। 337 टन कचरे को जलाने में महीनों लगेंगे। कचरे को लेकर मन में शंकाएं हो सकती हैं, भ्रांतियां हो सकती हैं, लेकिन सरकार पूरी जिम्मेदारी के साथ कचरे का निष्पादन करेगी।



डॉ. संजय लोंढे ने सवाल उठाया कि भोपाल का कचरा इंदौर में ही क्यों जलाया जा रहा है? अफसरों ने कहा कि पहले जो ट्रायल किया गया। उसके आधार पर ही फैसला लिया गया। अतुल सेठ ने कहा कि ठंड के समय वातावरण में धुआं देर तक बना रहता है। कचरा अभी क्यों जलाया जा रहा है। अफसरों ने कहा कि कचरे के निपटान में चार से छह माह का समय लगेगा।
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डॉक्टर एसएस नैयर ने सवाल उठाया कि पहले जो कचरा जलाया गया, उसका खुलासा तब क्यों नहीं किया गया। हमेशा कचरा जलाने का काम छुप कर क्यों किया गया। अफसरों ने कहा कि सभी जनप्रतिनिधि को इस बारे में बताया गया था। शिक्षाविद एसएल गर्ग ने कहा कि जलाने से पहले कचरे की प्रयोगशाला में जांच होना चाहिए। एक घंटे चली बैठक में कचरा जलाने का खुलकर विरोध हुआ। 
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