इंदौर के रीगल तिराहे पर स्थित रानी सराय परिसर में मेट्रो अंडरग्राउंड स्टेशन निर्माण के लिए 200 पेड़ों की कटाई और छंटाई शुरू हो गई है। पर्यावरणविदों ने हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जबकि प्रशासन ट्रांसप्लांट की बात कह रहा है।
इंदौर के रीगल तिराहे पर स्थित रानी सराय परिसर में मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशन के निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। परिसर में रविवार से ड्रिलिंग और पेड़ों की छंटाई का काम तेजी से प्रारंभ कर दिया गया है। मेट्रो परियोजना के चलते यहां स्थित लगभग 200 पुराने पेड़ों को काटने और ट्रांसप्लांट करने की प्रक्रिया चल रही है।
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पक्षी वैज्ञानिकों की निगरानी और ट्रांसप्लांट का दावा
रानी सराय परिसर के घने वृक्ष लंबे समय से हजारों तोतों का आशियाना रहे हैं। पर्यावरणविदों द्वारा इस कटाई का विरोध किए जाने के बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा था। न्यायालय ने पक्षी वैज्ञानिकों की निगरानी में पेड़ों की कटाई और छंटाई की अनुमति प्रदान की है। प्रशासन का दावा है कि पेड़ों की छंटाई के दौरान तनों को सुरक्षित रखा जा रहा है ताकि उन्हें दूसरी जगह ट्रांसप्लांट करके जीवित रखा जा सके।
हाई कोर्ट के आदेश के उल्लंघन का आरोप
दूसरी ओर पर्यावरणविदों ने मेट्रो कॉरपोरेशन पर उच्च न्यायालय के आदेश का पालन न करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि डबल बेंच ने निर्देश दिया था कि पक्षी वैज्ञानिकों की नियुक्ति मामले में इंटरवेनर पद्मश्री भालचंद्र मोढ़े के सुझाव पर की जाएगी। पर्यावरणविदों का दावा है कि इस तय प्रक्रिया को पूरा किए बिना ही कॉरपोरेशन ने पेड़ों की छंटाई शुरू कर दी है।
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जन आंदोलनों और संस्थाओं का विरोध
रानी सराय के ऐतिहासिक वृक्षों को बचाने के लिए शहर की कई सामाजिक संस्थाओं ने लंबे समय तक संघर्ष किया है। पेड़ों को कटने से बचाने के लिए रीगल तिराहे पर कई प्रदर्शन आयोजित किए गए थे, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया था। इसके अतिरिक्त जनहित पार्टी के संस्थापक अभय जैन ने परिसर में 1 महीने तक धरना भी दिया था। इन जन आंदोलनों के बावजूद अब मेट्रो निर्माण के लिए कटाई की कार्रवाई जारी है।