मालेगांव बम धमाका मामले में बरी हुए इंदौर के श्याम साहू ने अमर उजाला से चर्चा में खुद की गिरफ्तारी और प्रताड़ना से लेकर निर्दोष साबित होने तक का पूरा किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि मुझे गिरफ्तार किया गया तो पता भी नहीं था कि किस केस में मुझे ले जा रहे हैं। महाराष्ट्र एटीएस के मुंबई दफ्तर में मुझे ले जाया गया और यातनाएं देना शुरू कर दिया गया। मुझे जिस कमरे में रखा था, उसके पास के कमरे में महिला के चीखने और रोने की आवाजें आती थीं। दूसरे दिन जब हमारा सामना कराया गया तो पता चला कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भी केस में फंसाया गया है। मारपीट के कारण दीदी से तो पैर पर खड़े होते भी नहीं बन रहा था।
चक्की के पट्टे से मारते थे हमें
साहू ने एटीएस हिरासत के दिनों को याद करते हुए कहा कि हमारे कपड़े उतार दिए जाते थे। सिर्फ अंतरवस्त्र में रखा जाता था। चक्की के पट्टे से पैर के तलवों पर मारते थे और बड़े लठ्ठ जांघों के बीच रखे जाते थे और वजनदार लोग लठ्ठ पर पैर रखकर उसे रोल करते थे, लगता था कि हमारी चमड़ी फट जाएगी। कांच के कमरे में रखा जाता था। कभी कभी मन में ख्याल आने लगते थे कि जो गुनाह हमने किया नहीं है, वह भी इस यातना से बचने के लिए कबूल कर लें, लेकिन हम झूठ के आगे नहीं झुके। एसी वाले कमरे का तापमान पांच, छह डिग्री पर रखकर बेहद ठंडे कमरे में हमें घंटों रखा जाता था। कांच के दूसरी तरफ से हमें अफसर देखते थे। हालत खराब होने पर वे हमारे पास आते थे और बोलते थे कि जो हम बोल रहे हैं, वह कबूल कर लो।