एमवाय अस्पताल में चूहाकांड के बाद कबड्डी की राष्ट्रीय स्पर्धाएं खेल चुकी एक महिला खिलाड़ी को एक्सपायरी डेट की एंटीबॉयोटिक दवा चढ़ाने का मामला सामने आया है। परिवार की शिकायत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जांच शुरू कर दी है, लेकिन सवाल यह उठता है कि अस्पताल के स्टाॅक में एक्सपायरी डेट की दवाएं कैसे रखी जा रही हैं। परिजनों का दावा है कि यह दवा सिर्फ खिलाड़ी को ही नहीं, अन्य मरीजों को भी चढ़ाई जा रही है।
इंदौर निवासी रोशनी सिंह लंबे समय से बीमार है। वे कबड्डी की राष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुकी है। आर्थिक परेशानियों के चलते वह निजी अस्पताल में इलाज नहीं करवा पा रही थी। इस कारण उन्हें एमवाय अस्पताल में भर्ती किया गया था। पति सागर ने कहा कि हमने एमवाय अस्पताल पर भरोसा था कि रोशनी इलाज के बाद ठीक हो जाएगी, लेकिन यहां लापरवाही के चलते उसके जीवन से नर्सिंग स्टाॅफ ने खिलवाड़ कर दिया। रोशनी सिंह को एसिटिक फ्लूइड की मात्रा की समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती किया गया था।
डाॅक्टर ने सिप्रो नामक एंटीबायोटिक दवा की वॉयल चढ़ाने के लिए लिखी थी। स्टाॅफ जो सलाइन लगाने के लिए लाया। उसकी एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी थी। सागर ने इसकी जानकारी स्टाॅफ को दी तो उन्होंने एमवाय अस्पताल अधीक्षक से बात करने के लिए कहा। नर्स ने यह भी कहा कि इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता है।
उधर, इस मामले में एमवाय अस्पताल अधीक्षक अशोक यादव ने कहा कि शिकायत हमारे पास आई थी। जानकारी मिलने के बाद नर्स ने दवा हटा ली थी। उधर, इस मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मामला गंभीर है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ एक्शन लिया जाना चाहिए।