मेट्रो कोच में इक्का-दुक्का यात्री ही सफर करते नजर आए।
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इंदौर में मेट्रो का संचालन 17 किलोमीटर हिस्से में शुरू तो हो गया, लेकिन तीसरे ही दिन यात्रियों का मोह कम होने लगा। सोमवार को कोच में इक्का-दुक्का यात्री ही सफर करते नजर आए। शाम को जरूर कोच में थोड़े यात्री दिखे, लेकिन दिनभर मेट्रो ट्रेन खाली-खाली ही चली। सुबह से लेकर शाम तक मेट्रो ट्रेन चलती रही। कुछ यात्री मेट्रो ट्रेन में सफर का लुत्फ लेने के लिए मेट्रो ट्रेन में सवार हुए।शनिवार से मेट्रो ट्रेन का संचालन गांधी नगर से रेडिसन चौराहा तक शुरू हुआ।
16 स्टेशनों से ट्रेन को एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में 50 मिनट का समय लग रहा है। ट्रेन हर स्टेशन पर आधा मिनट रुक रही है, लेकिन सोमवार को न स्टेशनों पर चहल-पहल दिखी, न मेट्रो ट्रेन के कोच में ज्यादा यात्री नजर आए। रविवार को मेट्रो ट्रेन में छह हजार यात्रियों ने यात्रा की, लेकिन सोमवार को यह संख्या आधी से भी कम थी।
मेट्रो ट्रेन में अपने दफ्तर जाने के लिए सवार एक यात्री ने कहा कि वे कार से अपने संस्थान तक 25 मिनट में पहुंच जाते हैं, लेकिन मेट्रो ट्रेन में 35 मिनट का समय लगा। स्टेशनों की जानकारी देने के लिए होने वाले अनाउंसमेंट की आवाज भी ज्यादा है।
सुपर कॉरिडोर पर टीसीएस, इंफोसिस जैसे संस्थान हैं। दोनों कंपनियों में चार हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन उनके लिए स्टाफ बसों की व्यवस्था है। इस कारण वे भी मेट्रो ट्रेन का उपयोग नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा कॉलेजों के छात्रों को भी स्टाफ बसें लेने आती हैं।मेट्रो ट्रेन में विजय नगर से सुखलिया, बापट तक जाने वाले लोग जरूर आना-जाना कर रहे हैं।