पिलरों में भी दरारें हैं।
- फोटो : amarujala
हॉस्टल बिल्डिंग में 50 से ज्यादा कमरे हैं, लेकिन आगे वाला ब्लॉक रहने लायक स्थिति में नहीं है। बरामदे में अटाला रखा है। पीछे वाले ब्लॉक के बाथरूम के दरवाजे टूटे हैं। टाइल्स उखड़ चुकी हैं और नल-टोटियां गायब हो चुकी हैं। मेंटेनेंस के नाम पर सालभर में जो भी राशि मंजूर होती है, उसके काम पूरे हॉस्टल में नजर नहीं आ रहे हैं।
होस्टल के बाथरुम के ये हाल
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पिलरों में भी दरारें आ गईं
छत और दीवारों के प्लास्टर तो कई जगह उखड़े हैं, लेकिन गंभीर स्थिति यह है कि कुछ पिलरों में भी दरारें हैं। ये बिल्डिंग को कमजोर कर सकती हैं और हादसे की वजह बन सकती हैं। यहां रहने वाले विद्यार्थी अपनी पहचान उजागर किए बगैर समस्याओं की पूरी फेहरिस्त सामने रख देते हैं।
उनका कहना है कि पीने का पानी हमें कई बार बाहर से लाना पड़ता है। कई बार हॉस्टल की बिजली गुल हो जाती है। हॉस्टल बिल्डिंग तक आने वाला रास्ता बारिश के दौरान नदी जैसा बन जाता है। कई बार शिकायत की तो अब मलबा डाला गया है। बिल्डिंग में पेस्ट कंट्रोल बरसों से नहीं हुआ है। परिसर के कच्चे हिस्से में चूहों की बस्तियां बन चुकी हैं। इस कारण सांपों का डर भी हॉस्टल में बना रहता है। कई चूहों ने जमीन के हिस्सों को खोखला कर दिया है। इस कारण टाइल्स भी उखड़ गई हैं।