जमीन का सरकारी खसरे पर होना उसके मालिकी हक और भू उपयोग को बताने के लिए जरूरी होता है, लेकिन इंदौर के 40 एकड़ में फैला जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम और उसकी जमीन सरकारी खसरे यानी रिकॉर्ड में ही नहीं है। खतरनाक हो रहे इस स्टेडियम को तोड़कर नया बनाने की योजना बनाने के लिए नगर निगम ने रिकॉर्ड खंगाले तब उन्हें इस बात का पता चला। अब स्टेडियम की जमीन को रिकॉर्ड पर दर्ज कराया जाएगा, ताकि जमीनी काम शुरू हो सके।
रेसीडेंसी क्षेत्र में स्थित इस स्टेडियम का निर्माण 61 साल पहले हुआ था। यहां कई अंतरर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच हुए। अभी भी यहां शहर में सबसे ज्यादा खेल गतिविधियां होती हैं, लेकिन बिल्डिंग के कई हिस्से खतरनाक हो चुके हैं। डेढ़ साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर के स्थापना दिवस पर नेहरू स्टेडियम की नई बिल्डिंग की घोषणा की थी।
रिकॉर्ड में दर्ज होने पर आगे कार्रवाई
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि हमने कंसल्टेंट नियुक्त किया था। स्टेडियम के पुनर्विकास की योजना भी बना ली गई, लेकिन स्टेडियम की जमीन सरकारी खसरे में नहीं है। प्रशासनिक अफसरों को भी यह मामला संज्ञान में लाया गया है। सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने के बाद योजना पर आगे काम किया जाएगा।
500 करोड़ खर्च होंगे प्रोजेक्ट पर
नगर निगम ने पीपीपी माॅडल पर स्टेडियम की जमीन पर स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स के निर्माण की प्लानिंग की है। इस प्रोजेक्ट पर 500 करोड़ खर्च होंगे। छोटा नेहरू स्टेडियम की जमीन को भी इसमें जोड़ा जाएगा। स्टेडियम के एक हिस्से को उपयोग कमर्शियल किया जाएगा, ताकि वहां खेल से जुड़ी दुकानें संचालित हो सके। इसके अलावा खिलाड़ियों के रुकने के लिए अलग-अलग कमरे भी यहां बनाए जाएंगे। अभी स्टेडियम में खिलाड़ियों के रुकने की व्यवस्था नहीं होने से काफी परेशानी आती है।