प्रदेश में होटलों और रेस्टोरेंट्स को मिलने वाली कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति अब तक पूरी तरह सामान्य नहीं होने से होटल सेक्टर में संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। इस मुद्दे को लेकर मध्य प्रदेश होटल एसोसिएशन की बैठक आयोजित की गई, जिसमें होटल संचालकों ने स्थिति से निपटने के लिए रणनीति बनाई। गैस की अधिक खपत वाले मेन्यू को हटाया जा रहा है और इंडक्शन जैसे वैकल्पिक साधनों का भी उपयोग किया जा रहा है।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया कि वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई है, जिससे आतिथ्य उद्योग के संचालन में कठिनाइयां आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद होटल उद्योग अपने अतिथियों को सेवा देने के लिए वैकल्पिक साधनों, सीमित मेन्यू और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से भोजन व्यवस्था बनाए रखने का हर संभव प्रयास कर रहा है। जिन होटलों में आवास, रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल संचालित होते हैं, वहां गैस की कमी का असर अधिक देखने को मिल रहा है।
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सुमित सूरी ने कहा कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले समय में होटल और रेस्टोरेंट उद्योग के सामने संचालन संबंधी चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं। होटल सेक्टर रोजगार देने वाला एक बड़ा क्षेत्र है, जिसमें शेफ, किचन स्टाफ, सर्विस स्टाफ, हाउसकीपिंग, तकनीकी कर्मचारी और अन्य सहयोगी कर्मचारी कार्यरत हैं। मौजूदा हालातों के बावजूद उद्योग यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि कर्मचारियों की आजीविका पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
होटल संचालक इस कठिन परिस्थिति में भी अपने कर्मचारियों को काम पर बनाए रखने और किसी प्रकार की छंटनी से बचने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि होटल उद्योग की मजबूती उसके कर्मचारियों की मेहनत और समर्पण पर ही आधारित है।
मध्य प्रदेश होटल एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि आतिथ्य उद्योग के महत्व को देखते हुए इस क्षेत्र को आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में रखते हुए सहयोग प्रदान किया जाए, क्योंकि यह क्षेत्र पर्यटन, व्यापारिक गतिविधियों और बड़े पैमाने पर रोजगार से सीधे जुड़ा हुआ है।