फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंदौरः पुलिस ड्राइवर की 51 प्रॉपर्टी मिली, 68 करोड़ रुपए कीमत, अब ईडी कस सकती है शिकंजा

Mon, 26 Oct 2026 12:05 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान के पास 68 करोड़ रुपए से अधिक की 51 अचल संपत्तियां मिली हैं। लोकायुक्त की विवेचना और चालान के बाद इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जांच शुरू की जा सकती है।
विज्ञापन
हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इंदौर में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान से जुड़ी आय से अधिक संपत्ति की जांच में 51 अचल संपत्तियां मिली हैं। इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य 68 करोड़ रुपए से अधिक आंका गया है। इतने बड़े पैमाने पर संपत्ति उजागर होने के बाद अब इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के भी आगे जांच करने की संभावना बन रही है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के अनुसार लोकायुक्त की विवेचना पूरी होने और कोर्ट में चालान पेश होने के बाद ही ईडी की कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना है, ताकि जांच एजेंसी के पास ठोस आधार उपलब्ध हो सके। फिलहाल, लोकायुक्त की टीम सभी संपत्तियों के दस्तावेजों, बैंक खातों और निवेश के विभिन्न स्रोतों की गहन पड़ताल में जुटी हुई है। जांच के दौरान मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि ये तमाम संपत्तियां भ्रष्टाचार के माध्यम से अर्जित रकम से खरीदी गईं या नहीं, और क्या उस काली कमाई को दूसरे लोगों अथवा कंपनियों के नाम पर रखकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया गया था।
विज्ञापन


सरकारी सेवा में रहते हुए बनाई अकूत संपत्ति
फिरोज खान ने अपनी सरकारी सेवा के दौरान निर्धारित आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक राशि अर्जित की। उनके द्वारा बनाई गई कुल संपत्तियों की बाजार में अनुमानित कीमत 68 करोड़ रुपए पाई गई है। इस दौरान उन्होंने विशेष रूप से जमीन के बड़े-बड़े सौदे किए और कई कंपनियां भी खड़ी कीं। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत आवश्यक शर्तें पूरी होती पाई जाती हैं, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले को अपने हाथ में लेकर जांच कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल संपत्तियों का अत्यधिक मूल्य सामने आना या आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगना अपने आप में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध साबित नहीं करता है।

बेनामी संपत्तियों और अन्य लोगों के नाम दर्ज भूखंडों की जांच
लोकायुक्त द्वारा की गई अब तक की जांच में कुल 51 अचल संपत्तियों का खुलासा हुआ है, जिनका कुल अनुमानित बाजार मूल्य 68.01 करोड़ रुपए बताया गया है। इन संपत्तियों में आरोपी के परिवार के सदस्यों, उनके परिचितों तथा संबंधित कंपनियों के नाम पर दर्ज संपत्तियां भी जांच के घेरे में हैं। हाल ही में देवास जिले के राजोदा गांव में 1.15 हेक्टेयर कृषि भूमि दो महिलाओं रोशनी वर्मा और रानू कुशवाह के नाम पर दर्ज पाई गई। इस जमीन का सरकारी पंजीयन मूल्य करीब 1.65 करोड़ रुपए तथा अनुमानित बाजार मूल्य 2.30 करोड़ रुपए बताया गया है। इस तरह के मामलों में ईडी के लिए यह पता लगाना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि जमीन की खरीद के लिए वित्तीय भुगतान किसने किया, किस बैंक खाते से लेन-देन हुआ, संबंधित महिलाओं की आय के स्रोत क्या हैं और उस संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण किसका है। कानूनी दृष्टिकोण से केवल किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर संपत्ति दर्ज होने से यह सीधे तौर पर सिद्ध नहीं होता कि वह बेनामी है या उसका संबंध किसी अपराध से है। इसके लिए वित्तीय लेन-देन और अन्य पुख्ता साक्ष्यों का न्यायिक परीक्षण आवश्यक होगा। यदि इन तमाम पहलुओं पर पर्याप्त कानूनी आधार मिलते हैं, तो ईडी नियमानुसार कार्रवाई करते हुए संपत्ति की पहचान, अस्थायी कुर्की और अभियोजन की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें