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Indore Gaurav Diwas: कैसे एक गांव से मालवा का गौरव बना इंदौर, अब दुनिया में आकर्षण का मुख्य केंद्र बन रहा

Tue, 30 May 2023 10:42 PM IST
अर्जुन रिछारिया न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

31 मई को इंदौर गौरव दिवस (Indore Gaurav Diwas) मनाया जा रहा है। इस मौके पर जानते हैं इंदौर का यह स्वर्णिम सफर कैसा रहा। 
 
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जफर अंसारी, हिस्टोरियन एंड कंजर्वेशनिस्ट फाउंडर, जफर अंसारी म्यूजियम ऑफ इंदौर कलेक्शन - फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
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दुनिया में इंदौर की एक खास पहचान है। इतिहास से आज तक इंदौर लोगों के लिए हमेशा आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है। खेल, राजनीति, खानपान, उद्योग, फैशन से लेकर लगभग हर क्षेत्र में इंदौर के नागरिकों ने अपना परचम लहराया है। आइए इंदौर गौरव दिवस (Indore Gaurav Diwas) के मौके पर जानते हैं एक छोटे से गांव से कैसे मालवा के गौरव के रूप में उभरकर इंदौर सामने आया। इतिहासकार जफर अंसारी की रिपोर्ट...
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3 मार्च 1716 में नंदलालपुरा में राव मंदार मंडलोई ने यहां पर पहली व्यापारिक बस्ती बसाई। उस वक्त इंदौर एक छोटे गांव की तरह था। यह इस पूरे क्षेत्र में पहली टैक्स फ्री व्यापारिक बस्ती थी। उस वक्त मुगलों से अनुमति लेकर इसे व्यापारिक विकास के लिए बनाया गया था। 

1732 में सूबेदार मल्लारराव होलकर को देपालपुर में जागीर मिली और इसके बाद उन्होंने दूर दूर तक इंदौर का विस्तार किया। ये एक अच्छे योद्धा थे। देपालपुर को वे फौज के गढ़ के रूप में उपयोग करते थे। इसके बाद इंदौर का साम्राज्य तेजी से आगे बढ़ा।
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1767 में देवी अहिल्या बाई होलकर को गादी मिली और उन्होंने 28 साल शासन किया। अहिल्या माता इंदौर कम आईं, वे महेश्वर से ही शासन करतीं थी। उन्होंने इंदौर में कंपेल को होलकर रियासत का हेडक्वाटर बनाया तो यहां पर विकास तेजी से बढ़ा। 

1817 में महिदपुर में युद्ध हुआ और होलकर ईस्ट इंडिया से हार गए। इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी इंदौर आई। सर जान मालकम ने महू को फौज की छावनी बनाया। 1818 के बाद इंदौर का विकास और तेज हुआ। यहां पर अंग्रेजों की कोठियां बनी। महेश्वर, भानपुरा के बाद इंदौर तीसरी कैपिटल बनी। अंग्रेजों ने यहां पर शिक्षा, स्वास्थ्य का विकास किया। 

1886 के बाद औद्योगिकरण का दौर शुरू हुआ। शिवाजीराव होलकर ने 1886 से 1903 तक शासन किया और सबसे अधिक इमारतें बनवाईं। उस वक्त अफीम और कपास इंदौर का मुख्य व्यापार था। यहां से अफीम चीन जाती थी। 

1909 में अफीम बंद हुआ तो पूरा पैसा कपड़ों के कारोबार में लगा और मीलें बनती गई। मीलें बनने के बाद देशभर के लोग यहां पर रोजगार के लिए आने लगे और इंदौर देश का मुख्य औद्योगिक केंद्र बन गया। इसके बाद सेठ हुकुमचंद ने इस कपड़ा उद्योग को नई ऊंचाईयां दी और यह कारोबार देशभर में फैला।

1926 में यशवंतराव होलकर राजा बने इस वक्त वे नाबालिग थे और 1930 में उन्हें पूरी तरह अधिकार मिले। इसके बाद उन्होंने इंदौर को नई पहचान दिलाई। जर्मनी फ्रांस में भी लोग उन्हें पहचानते थे। वे फैशन और स्टाइल के शौकीन थे। वे सबसे सर्वाधिक लोकप्रिय हुए। पेंटिंग, फोटोग्राफी जैसे तमाम आर्ट के लिए उन्होंने बहुत काम किया। 
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