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Indore: इंदौर के भागीरथपुरा से दूरी- रिश्तेदार घर नहीं आते, मिलने से भी कतराते है

Thu, 08 Jan 2026 07:01 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

भागीरथपुरा में हुई मौतों और बीमारी की दहशत अब लोगों के रिश्तों और काम-धंधे पर भारी पड़ने लगी है। शहर के दूसरे इलाकों में रहने वाले रिश्तेदारों और दोस्तों ने दूरी बना ली है, और जो लोग आते भी हैं वे बस्तीवालों के यहां पानी पीने तक से कतरा रहे हैं।
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मिनरल वाॅटर से चाय बनाते दुकानदार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर के भागीरथपुरा में बीते दिनों हुई 18 मौतों और डेढ़ हजार से ज्यादा लोगों के बीमार होने का खौफ अब इलाके की सीमाओं को लांघकर रिश्तों और कारोबार तक पहुंच गया है। कल तक जो रिश्तेदार और दोस्त भागीरथपुरा की तंग गलियों में आत्मीयता के साथ आते थे, अब उन्होंने बस्ती के लोगों से दूरी बना ली है। बस्तीवालों का कहना है कि महामारी के बाद बस्ती को लेकर बने माहौल ने दूरी पैदा कर दी है।

 

क्षेत्र के रहवासी नीलेश पाल बताते हैं कि रिश्तेदारों ने आना-जाना लगभग बंद कर दिया है। अगर कोई जरूरी काम से आता भी है, तो घर के बाहर से ही बात करके निकल जाता है। बस्ती में रहने वाले शिवांग स्टूडेंट है। वे बताते है कि दूसरे इलाकों में रहने वाले दोस्त अब सिर्फ फोन पर ही हालचाल पूछ लेते हैं। हमें ऐसा महसूस कराया जा रहा है जैसे पूरा भागीरथपुरा ही संक्रमित हो गया हो। जो यहां सर्वे के लिए आ रहे है, लाइनों को ठीक कर रहे है। वे भी पानी की बोतल लेकर आते हैं और चाय-नाश्ते के लिए भी बस्ती से दूर जाते है। कुछ लोग अफवाह भी फैलाते है। इस पर रोक लगना चाहिए।

 

उधर बस्ती में सब्जी, फल बेचने वालों पर भी बस्ती में फैली बीमारी का असर पड़ा है। बस्ती में सब्जी बेचने वाले और चाय-नाश्ते की होटल चलाने वाले दुकानदार अब ग्राहकों की राह ताक रहे हैं। पहले जो लोग मुख्य सड़क से गुजरते समय रुककर सब्जियां खरीद लिया करते थे या होटलों पर नाश्ता करते थे, वे अब संक्रमित होने के डर से सीधे निकल जाते हैं। दूसरी बस्तियों से आने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है।

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