इंदौर हाईकोर्ट में राम मंदिर मामले में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने याचिका लगाई थी। गुरुवार को हुई सुनवाई में वे मौजूद रहे। सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग के दुरुपयोग का हवाला देकर उन्होंने उसे बंद करने का आग्रह किया। जिसे कोर्ट ने माना। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मंदिर वे भी राम मंदिर निर्माण के पवित्र काम का समर्थन करते है, इसके लिए उन्होंने भी राशि दी, लेकिन यह काम स्वेच्छिक होना चाहिए।
दान के लिए अल्पसंख्यक वर्ग पर दबाव नहीं बनाना चाहिए। इसकी आड़ में कई जगह अल्पसंख्यक लोगों को टारगेट किया। धन संग्रह रैलियों के दौरान हिंसा भी हुई, लेकिन अफसरों ने इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया था।
सिंह ने कहा कि राम मंदिर के धन संग्रह की आड़ में इंदौर, मंदसौर, उज्जैन में हिंसा की घटनाए सामने आए थे। इससे सांप्रदायिक उन्माद फैला और कानून व्यवस्था की स्थिति भी बिगड़ी।कोर्ट ने सभी पक्षों को सुना है। इस याचिका में प्रदेश सरकार, गृह विभाग के प्रमुख सचिव, डीजीपी के अलावा इंदौर, मंदसौर व उज्जैन के कलेक्टर, एसपी को भी पक्षकार बनाया गया है। आपको बता दे कि इस केस में 10 नवंबर को भी सुनवाई हुई थी।
तब याचिकाकर्ता सिंह के वकील रवींद्र छाबड़ा ने कहा कि सुनवाई के दौरान सिंह भी अपना पक्ष रखना चाहते है। कोर्ट ने उन्हें 27 नबंवर को पेश होने के लिए कहा था। सिंह बुधवार को ही इंदौर आए गए थे। वे संविधान दिवस के समारोह में शामिल होने के अलावा कांग्रेस के नेता व कार्यकर्तागणों से भी मिले थे।