इंदौर के जिला कोर्ट में चेक बाउंस के एक मामले में आरोपी संतोष कुमरावत के फरार होने की घटना ने सभी को चौंका दिया है। कोर्ट में उपस्थित संतोष को 25 अक्टूबर 2024 को 6 महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई थी। इस मामले में संतोष पर आरोप था कि उसने एक चेक बाउंस कर दिया था, जिससे 4 लाख 20 हजार रुपये का भुगतान लंबित था। यह रकम ब्याज सहित अदालत द्वारा निर्धारित की गई थी। अदालत ने यह भी आदेश दिया था कि यदि संतोष यह राशि नहीं चुकाता, तो उसे 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
मौके का फायदा उठाया
संतोष न्यायालय कक्ष में सजा सुनने के लिए उपस्थित था। जैसे ही जज ने उसे 6 महीने की सजा सुनाई, उसके वकील ने तुरंत जमानत की अर्जी दाखिल की और जमानत प्रक्रिया के लिए बाहर चले गए। इस बीच संतोष अदालत की अभिरक्षा में था। कोर्ट में मौजूद अन्य लोगों का ध्यान कहीं और था, इसी का फायदा उठाते हुए संतोष मौके से फरार हो गया। किसी को भी यह आभास नहीं हुआ कि संतोष अदालत से भागने की योजना बना रहा है।
और इस तरह पता चला संतोष भाग गया
काफी देर तक जब संतोष न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ, तो अदालत के अधिकारियों को संदेह हुआ। जज ने तुरंत पुलिस को बुलाने के आदेश दिए, और एमजी रोड पुलिस स्टेशन को इस मामले में सूचित किया गया। इसके बाद अदालत के रीडर ने संतोष के खिलाफ फरार होने की रिपोर्ट दर्ज कराई। एमजी रोड पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और संतोष की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि संतोष का निवास स्थान अन्नपूर्णा रोड पर जयपुर कैटरर्स दुकान के पास है। वे उसके घर और अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रहे हैं, ताकि उसे जल्द से जल्द पकड़ा जा सके। पुलिस की टीम उसके परिजनों और दोस्तों से भी पूछताछ कर रही है कि कहीं वह उनके संपर्क में तो नहीं है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस समय संतोष फरार हुआ, उस समय वह अदालत की हिरासत में था। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कमी का फायदा उठाते हुए उसने मौके का लाभ उठाया और फरार हो गया। यह घटना इस ओर इशारा करती है कि अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त करने की जरूरत है, ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। कोर्ट से किसी आरोपी का इस तरह से फरार होना एक गंभीर मामला है। अब पुलिस संतोष की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग प्रयास कर रही है। कुल मिलाकर, यह घटना इंदौर के न्यायिक व्यवस्था में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा रही है। पुलिस और अदालत के बीच बेहतर समन्वय और सतर्कता की आवश्यकता है, ताकि अदालत से आरोपी फरार न हो सके और न्याय की प्रक्रिया बाधित न हो।