इंदौर नगर निगम में जनसुनवाई के दौरान 70 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतें अवैध निर्माण से जुड़ी आ रही हैं। इसके अलावा शिकायत के बाद कई लोग भवन निर्माताओं को ब्लैकमेल भी करते हैं। इसे देखते हुए निगमायुक्त ने अब अफसरों को निर्देश दिए हैं कि शिकायतकर्ता के अवैध निर्माणों की भी जांच की जाए। निगमायुक्त शिवम वर्मा ने कहा कि अवैध निर्माण की शिकायत लेकर आने वाले लोगों के निर्माणों की भी जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि उन्होंने वैध निर्माण किया है या अवैध? इसके साथ ही उनके द्वारा की गई कि शिकायत की भी जांच की जाएगी। दरअसल, जनसुनवाई में ज्यादातर शिकायतें पड़ोसी अवैध निर्माणों को लेकर करते हैं। जब अमला जांच के लिए जाता है तो फिर दोनों पक्ष एक-दूसरे की शिकायतें करते हैं। जनसुनवाई में आने वाली शिकायतें कई बार जोनल स्तर पर भेज दी जाती हैं। प्राप्त शिकायती आवेदनों के आधार पर जांच के लिए जोन के कर्मचारी बार-बार मौके पर पहुंचते हैं। इसे लेकर कई बार भ्रष्टाचार के आरोप भी लग चुके हैं। इसे देखते हुए निगमायुक्त ने यह फैसला लिया है। इस आदेश के बाद उम्मीद है कि जनसुनवाई में वास्तविक शिकायतों की संख्या बढ़ेगी और फर्जी शिकायतों में कमी आएगी। पार्षद से कहा- अवैध निर्माण तोड़ने टीम जाए तो मत रोकना पार्षद जीतू यादव से हुए विवाद के बाद चर्चा में आए सिंधी काॅलोनी वार्ड के पार्षद कमलेश कालरा मंगलवार को जनसुनवाई में आए। उन्होंने वार्ड से जुड़ी शिकायतें निगमायुक्त को बताईं। निगमायुक्त ने पार्षद से कहा कि- निगम की टीम वार्ड में अवैध कब्जे हटाने जाए तो फिर रुकवाने के लिए फोन मत करना। उन्होंने अफसरों से कहा कि कालरा के वार्ड से अतिक्रमण हटा दो, वार्ड को आदर्श बना दो।