इंदौर में 60 साल पहले बने शास्त्री ब्रिज के डिवाइडर पर लोहे की नुकीली रैलिंग लगाने का फैसला नगर निगम ने लिया। इसका काफी विरोध हुआ। 200 मीटर हिस्से में रैलिंग लगा भी दी गई। इसके बाद निगम अफसरों को भी लगा कि इससे हादसे हो सकते हैं, तब निगमायुक्त शिवम वर्मा के निर्देश पर काम रोक दिया गया। मंगलवार से रैलिंग हटाने का काम शुरू हो गया। लोगों का कहना है कि गलत फैसले के कारण जनता की कमाई नगर निगम यूं ही खर्च करता है। इससे वाहन चालकों की परेशानी भी बढ़ जाती है। रेलवे पटरी को क्रॉस करने के लिए शहर का पहला शास्त्री ब्रिज 60 साल पहले बना था। तब ब्रिज फोरलेन बना था, लेकिन अब लगातार ट्रैफिक का दबाव ब्रिज पर बढ़ रहा है। ब्रिज को फोरलेन बनाने की मांग भी उठ रही है। ब्रिज का चौड़ीकरण तो नहीं हुआ, लेकिन नगर निगम के अफसरों ने पुराने ब्रिज से अस्थाई डिवाइडर हटाकर पक्के डिवाइडर बनाकर रैलिंग लगाने का काम शुरू कर दिया था। रैलिंग की डिजाइन भी काफी नुकीली चुनी गई। इससे हादसे का खतरा हमेशा बना रहता था। टू लेन ब्रिज होने के कारण वैसे ब्रिज पर वाहनों के बीच की गेप कम रहती है। इस कारण रैलिंग के कारण हादसे बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों ने जताई थी। जब अफसरों को गलती समझ आई तो उन्होंने रैलिंग लगाने का काम बीच में ही रोक दिया। दो दिन में 200 मीटर हिस्से में लगाई रैलिंग भी हटा ली जाएगी। कई हिस्से हो चुके हैं जर्जर शास्त्री ब्रिज काफी पुराना है। उसके कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं। ब्रिज के गांधी हॉल वाले हिस्से में प्लास्टर उखड़ने के कारण सरिए भी दिखाई देने लगे हैं। इसके अलावा फुटपाथ के हिस्से में भी दो माह पहले गेप आ गया था। फुटपाथ पर आया बीआरटीएस का टिकट काउंटर इंदौर में बीआरटीएस को हटाने के फैसले के बाद टिकट काउंटर अब बस स्टेशन के बजाए खुले में आ गया। दो दिन तो धूप में खड़े रहकर यात्रियों ने टिकट खरीदे, लेकिन अब फुटपाथ पर शेड लगा दिए गए हैं। बस रैलिंग हटाने के बाद अब बस स्टेशनों को भी बीआरटीएस से हटाया जाएगा।