इंदौर में 61 साल पुराने रीगल ब्रिज पर नगर निगम ने नया प्रयोग शुरू कर दिया है। यहां पहले अस्थाई डिवाइडर बीते पांच सालों से लगे थे और अब वहां स्थाई तौर पर डिवाइडर बनाए जा रहे है। इसके लिए ब्रिज के मध्य हिस्से को खोदा भी गया है। इससे ब्रिज का वजन और बढ़ सकता है।
61 साल पुराने इस ब्रिज के कुछ हिस्से खतरनाक हो चुके है और दोनो पैदल सीढि़यां इस कारण बंद करना पड़ी। कुछ हिस्सों में सीमेंट का प्लास्टर उखड़ चुका है और सरिए भी दिखाई देने लगे है। छह माह पहले ही ब्रिज की नगर निगम ने मरम्मत की थी।
रीगल ब्रिज इंदौर के नए और पुराने शहर के हिस्सों को जोड़ता है। यह दो लेन ब्रिज है। इस पर ट्रैफिक काफी बढ़ चुका है और यहां एक और ब्रिज बनाने की प्लानिंग की जा रही है। पुराने ब्रिज पर डिवाइडर रखने से हादसों का खतरा बढ़ सकता है, क्योकि कई बार ब्रिज पर दो पहिया वाहन अेावर टेक करते है और डिवाइडरों से टकराने का खतरा बना रहेगा।
नगर निगम डिवाइडर पर पोल लगाकर विद्युत सज्जा भी करेगा। अस्थाई डिवाइडर होन के कारण ब्रिज फिलहाल बगैर अनुमति लगने वाले पैनर पोस्टरों से बचा रहता था, लेकिन स्थाई डिवाइडर और पोल लगाने के बाद यहां भी बैनर पोस्टर नजर आने लगेंगे। नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि पुराने ब्रिज पर पैसा खर्च करने के बजाए नए ब्रिज की प्लानिंग नगर निगम को करना चाहिए,क्योकि दो लेन ब्रिज ट्रैफिक के हिसाब से कम उपयोगी साबित हो रहा है।