इंदौर में इसके लिए डेढ़ सौ से ज्यादा स्थानों पर कुंड बनाए गए है। बाणगंगा, विजय नगर, स्कीम-54, सुखलिया ग्राम, श्याम नगर, सिलीकान सिटी, कालानी नगर, निपानिया, एरोड्रम रोड, पिपलियाहाना तालाब सहित डेढ़ सौ स्थानों पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
देशभर के साथ ही इंदौर में भी उत्तर भारतीयों का खास छठ महापर्व मंगलवार से शुरू हुआ। पहले दिन नहाया-खाय से शुरूआत हुई। घरों की सफाई कर उन्हें पवित्र किया गया। मिट्टी के चूल्हे पर भोजन बनाया गया। अब चार दिनों तक अनुष्ठान होंगे। बुधवार को खरना होगा।
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इंदौर में उत्तर भारत से आए परिवार बड़ी संख्या में बसे हुए हैं। वे छठ महापर्व भी इंदौर में रहकर ही मनाने लगे हैं। मंगलवार को छठ महापर्व बनाने वाले परिवारों ने घरों में लौकी की सब्जी, चावल बनाए। महापर्व के दूसरे दिन बुधवार को खरना मनाया जाएगा। महिलाएं दिनभर निर्जला उपवास रखेगी। इसके बाद मिट्टी के चूल्हे पर बने व्यजंनों का प्रसाद के रूप में सूर्य भगवान को अर्पित किया जाएगा। बाद में इसे महिलाएं भी ग्रहण करेंगी और 36 घंटे का व्रत शुरू होगा।
गुरुवार को देंगे अस्त होते सूर्य को अर्घ्य
गुरुवार को जलकुंड में खड़े होकर अस्त हो रहे सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 8 नवंबर को महापर्व का समापन होगा। इस दिन सुबह सूर्योदय के साथ छठ मैय्या से सुख समृद्धि की कामना की जाएगी। इंदौर में इसके लिए 150 से ज्यादा स्थानों पर कुंड बनाए गए हैं। बाणगंगा, विजय नगर, स्कीम-54, सुखलिया ग्राम, श्याम नगर, सिलीकॉन सिटी, कालानी नगर, निपानिया, एरोड्रम रोड, पिपलियाहाना तालाब सहित डेढ़ सौ स्थानों पर सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।
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अवकाश घोषित करने की मांग
पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के महासचिव केके झा ने पिपलियाहाना और निपानिया तालाब पर स्थाई रूप से छठ पर्व के लिए घाट बनाने की मांग की है। उन्होंने प्रदेश सरकार से छठ महापर्व पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग भी की है।