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Ranjeet Hanuman: इंदौर हुआ हनुमानमय, शहर में अलसुबह निकली बाबा रणजीत की प्रभातफेरी में लाखों लोग जुटे

Mon, 23 Dec 2024 11:39 AM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

मंदिर के भक्त मंडल के सदस्यों के अलावा पुलिस नेे भी व्यवस्था संभाल रखी थी। बाबा के रथ से भी आतिशबाजी हो रही थी। महूनाका चौराहा पर सुबह सात बजे प्रभातफेरी पहुंची, तब तक उजाला हो चुका था। 
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बाबा रणजीत की प्रभातफेरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इंदौर के पश्चिम क्षेत्र में सोमवार को उत्सव जैसा माहौल था। चारों तरफ भीड़ ही भीड, भक्तों के लिए सजे व्यंजनों के स्टाॅल से उठती महक और भक्ती से भरा माहौल। मौका था बाबा रणजीत की प्रभातफेरी का। रात ढलते ही लोग बाबा रणजीत के दर्शनों के लिए घरों से निकल पड़े। उषानगर मेन रोड पर तो दीपावाली जैसा नजरा था।

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रोशनी से लक-दक मंचों के आसपास भगवा पताकाएं लहरा रही थीं। आतिशबाजी से आसमान रंगीन था और भक्त जय बाबा रणजीत के नारे लगा रहे थे। सोमवार सुबह आरती के बाद बाबा रणजीत की प्रभातफेरी निकली। इसकी तैयारी रविवार रात से ही हो गई थी। पूरी सड़क पर विशेष सफाई की गई, क्योंकि भक्त नंगे पैर इस प्रभातफेेरी में शामिल हुए। प्रभातफेरी में शामिल लाखों भक्तों की आवभगत के लिए पश्चिम क्षेत्र के रहवासी संघों व अलग-अलग संगठनों ने चाय, पोहे, काफी, बिस्किट, गाजर का हलवा, खीर सहित अन्य व्यंजनों के स्टाॅल लगाए थे।

प्रभातफेरी चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर निकली। उषा नगर, महूनाका, अन्नपूर्णा मंदिर, नरेंद्र तिवारी मार्ग होते हुए फिर मंदिर तक सुबह आठ बजे तक पहुंची। प्रभातफेरी में सबसे आगे नासिक ढोल दल, नृतक दल, हनुमान और रामदरबार की झांकी चल रही थी। बाबा रणजीत के रथ के आगे मंदिर के मुख्य पुजारी और नेता पैदल चल रहे थे।
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मंदिर के भक्त मंडल के सदस्यों के अलावा पुलिस ने भी व्यवस्था संभाल रखी थी। बाबा के रथ से भी आतिशबाजी हो रही थी। महूनाका चौराहा पर सुबह सात बजे प्रभातफेरी पहुंची, तब तक उजाला हो चुका था। कोहरे और ठंड के माहौल के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हो रहा था। दर्शन के लिए चौराहे पर लगातार भीड़ बढ़ती जा रही थी।

1985 में ठेले पर निकलती थी प्रभातफेरी
रणजीत हनुमान की प्रभातफेरी वर्ष 1985 में ठेले पर भगवान की तस्वीर रखकर निकाली जाती थी और मुठ्ठीभर भक्त ही इसके लिए जुटते थे। तब यात्रा महूनाका चौराह पर निकलती थी। धीरे-धीरे प्रभातफेरी का स्वरूप बदलने लगा।

वर्ष 2008 में बग्घी पर बाबा की प्रतिमा रखकर यात्रा निकाली गई, लेकिन वर्ष 2016 तक भक्तों की संख्या हजारों मेें जुटने लगी। इसके बाद हर साल भक्तों की संख्या मेें इजाफा होने लगा। पिछले साल तीन लाख लोगों से ज्यादा की भीड़ प्रभातफेरी में शामिल हुई थी।

 

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