इंदौर के प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मंदिर क्षेत्र में कोर्ट के आदेश पर नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8-10 अवैध मकान और दुकानें जमींदोज कर दीं। विस्थापितों ने कहा उनका रोजगार पूरी तरह खत्म हो गया। परिवारों की आर्थिक रीढ़ टूट गई।
इंदौर के प्रसिद्ध अन्नपूर्णा मंदिर क्षेत्र में नगर निगम प्रशासन द्वारा एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। मंदिर परिसर के आसपास बने अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों को हटाने के लिए निगम का दस्ता भारी पुलिस बल और संयुक्त दलबल के साथ मौके पर पहुंचा। इस प्रशासनिक अभियान के दौरान लगभग आठ से दस अवैध रूप से निर्मित मकानों और दुकानों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया। वर्तमान में इंदौर जिला प्रशासन और नगर निगम के संयुक्त प्रयासों से इस पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया है।
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प्रभावित बोले हमारे आजीविका का साधन चला गया
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर यह कार्रवाई की गई, वह जमीन अन्नपूर्णा ट्रस्ट के स्वामित्व में आती है। यह पूरी कार्रवाई माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है। बेदखल किए गए प्रभावित लोगों को इंदौर जिला प्रशासन और नगर निगम द्वारा अन्य स्थान पर स्थानांतरित और शिफ्ट करने की प्रक्रिया की जा रही है। वहीं प्रभावित लोगों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें उचित स्थान नहीं दिया है। उनके घर जमींदोज हो गए हैं और दुकानें भी तोड़ दी गई हैं। उनके व्यापार पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। इस परिस्थिति में उनके लिए घर चलाना भी संभव नहीं है। फूल की दुकान लगाने वाली नीमा ने कहा कि इस दुकान से ही उसका घर चलता था। प्रशासन यदि कहीं रहने की जगह दे भी देगा तो दुकान तो नहीं देगा, अब उसका घर कैसे चलेगा। वहीं दूसरी ओर स्थानीय रहवासियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस कार्रवाई के पश्चात क्षेत्र में यातायात का दबाव कम हुआ है और वाहन चालकों को आवागमन में काफी सुगमता हो रही है।
सामान सुरक्षित निकालने के बाद चार जेसीबी से तोड़फोड़
कार्रवाई को योजनाबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए नगर निगम का अमला चार जेसीबी मशीनों के साथ स्थल पर पहुंचा था। मौके पर मौजूद निगम, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए सबसे पहले निर्मित ढांचागत मकानों में रखा सारा सामान सुरक्षित बाहर निकलवाया। इसके उपरांत जेसीबी मशीनों की मदद से सभी अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
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स्थानीय निवासियों का विरोध और हाईकोर्ट याचिका का हवाला
कार्रवाई के दौरान स्थानीय निवासियों ने निगम के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। रहवासियों का तर्क था कि वे कई दशकों से अपने परिवारों के साथ यहां निवास कर रहे हैं और उनके पास आवश्यक दस्तावेज भी मौजूद हैं। स्थानीय निवासी नीमा ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वह फूल-हार बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। इसके अतिरिक्त एक अन्य निवासी ने दावा किया कि यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था और जिस दिन कार्रवाई की गई, उसी दिन इस पर सुनवाई निर्धारित थी। इसके बावजूद निगम की टीम ने समय दिए बिना उनके मकानों और दुकानों को हटा दिया।