इंदौर में फिर एक दो सिर वाली बच्ची ने जन्म लिया है। पिछले महीने भी दो सिर वाली बच्ची ने जन्म लिया था, लेकिन 16 दिन बाद उसकी मौत हो गई। एमवाय अस्पताल में जन्म लेने वाली बच्ची का शरीर एक है, लेकिन सिर व दिल दो है। फिलहाल उसके सभी अंग ठीक तरीके से काम कर रहे है। जटिल सर्जरी के बाद बच्ची ने जन्म लिया।
खरगोन के मोथापुरा गांव में रहने वाली सोनाली पति आशराम को 13 अगस्त को इंदौर के एमटीएच अस्पताल में डिलेवरी के लिए लाया गया था। सोनोग्राफी व अन्य जांचों के बाद डाक्टरों को पता चल गया था कि गर्भ में दो सिर वाला शिशु है। इस कारण सर्जरी के लिए सोनाली को एमवाय अस्पताल रैफर किया गया। सर्जरी के बाद सोनाली ने दो सिर वाली बच्ची को जन्म दिया। यह पहली संतान है। फिलहाल बच्ची को डाक्टरों की निगरानी में रखा गया है। उसका वजन भी काफी कम है, लेकिन शहरी के सभी अंग काम कर रहे है। बच्ची के सिर गर्दन से जुड़े है। भविष्य में आपरेशन की दोनों को अलग भी नहीं किया जा सकता है।
17 दिन तक जीवित थी बच्ची
इंदौर में कुछ दिन पहले 22 वर्षीय रुसा पति वीर सिंह भिलाला अस्पताल में भर्ती हुई थी। उसने दो सिर वाली बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची का वजह 2.82 किलो था। सोलह दिनों तक बच्ची को अस्पताल में रखा गया। बच्ची माॅ के दूध पर जीवित थी। इसके बाद उसे छुट्टी दे दी गई। घर ले जाने के बाद बच्ची की मौत हो गई। उसका एक दिल कमजोर था।
इसलिए होते है एक शरीर से जुड़े जुड़वा बच्चे
डाक्टरों का कहना है कि दो सिर वाले जुड़वा बच्चे पैदा होने की स्थिति तब होती है,जब निषेचन अंडे से बनने वाला भ्रूण पूरी तरह अगल होने के बजाए जुड़ा रहता है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही जुड़े होने से फिर वे एक साथ भ्रूण बनते है और विकसित होते है। इसे मोनोजाईगोटिक जुड़वा कहा जाता है।