इंदौर में पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। पांच घंटे तक ब्लैक लिस्टेड फर्मों से जुड़े केस पर जजों ने सभी पक्षों को सुना, लेकिन फैसला नहीं हो पाया। अब सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। नगर निगम के एक ठेकेदार ने ब्लैक लिस्टेड करने पर याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी। पहली बार दो अलग-अलग केसों की एक ही दिन में पांच और तीन जजों की बेंच ने सुनवाई की थी।
बेंच ने ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड मामले में सुनवाई की। इसके अलावा दूसरी बेंच ने वरिष्ठ नागरिकता अधिनियम में संतानों को अपील करने के अधिकार संबंधी मामले में सुनवाई हुई। एक सुनवाई में नगर निगम के ठेकेदार का पांच साल पहले टेंडर निरस्त कर दिया गया था और उसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था। ठेकेदार ने इसके खिलाफ कोर्ट की शरण ली थी।
सुनवाई के दौरान ठेकेदार के वकील ने पक्ष रखा कि कानूनन मध्यस्थता परिषद के पास इस बात का अधिकार नहीं है कि यदि किसी का ठेका गलत तरीके से निरस्त किया गया है और ब्लैक लिस्टेड किया गया है तो उसको परिषद सुन सके। उसे सुनने का अधिकार मध्यस्थता परिषद के पास नहीं है।
तीन जजों की बेंच ने पहले आदेश दिए थे कि यदि किसी कंपनी को ब्लैक लिस्टेड किया जाता है उसकी हानि की गणना रुपयों में करते हुए मध्यस्थता न्यायाधिकरण में केस दायर किया जाता है। कोर्ट को बताया गया कि यह फैसला लिया गया था, वह टोल टैक्स से जुड़ी फर्म है। सिविल का काम करने वाली फर्म में वित्तिय आंकलन संभव नहीं है। इस मामले में बहस अधूरी रही, जो बुधवार को भी जारी रहेगी।