इंदौर के अभय प्रशाल में रविवार को 13 वर्षीय जैन मुनि विजयचंद्र सागर जैन परंपरा की आध्यात्मिक विधा का जीवंत प्रदर्शन किया। यह आयोजन पहली बार इंदौर में हुआ। तिलकेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ ट्रस्ट और श्री संघ इंदौर की अगुवाई में होने वाले इस कार्यक्रम में इंदौर के आसपास के शहरों के लोग भी शामिल हुए। कार्यक्रम में उनसे 100 सवाल पूछे गए। बाल मुनि ने सभी सवालों को याद रखा और सभी का क्रम से जवाब दिया।
उनके जवाबों से जैन दर्शन, ध्यान, स्मृति विज्ञान को गहराई से समझने का मौका समाज के युवावर्ग को मिला। भक्तों ने उनसे पूछा कि मल्लिनाथ का जन्म कहां हुआ था। पंच परावर्तन क्या है? जैन मुनि विजयचंद्र ने सभी सवालों के जवाब दिए।
मुनि से सवाल पूछने में दो घंटे से ज्यादा का समय लगा। जब मुनि ने सवालों के जवाब दिए तो सवाल पूूूूछने वालों ने अपनी नोटबुक से पूछे गए सवाल भी जांचे। इस आयोजन का गोल्डन बुुक आफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज भी किया गया है। इंदौर में बाल जैैन मुनि का यह पहला आयोजन था। उनका जन्म राजस्थान के कोटा में हुआ है। दस वर्ष की उम्र में उन्होंंने दीक्ष ग्रहण की थी।