प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में शामिल होने न्यूयॉर्क से आई नूतन रुंगटा की कहानी संघर्षों से भरी है। वह मुबंई में रहती थी। 20 साल पहले पति ने तलाक दिया। लगा कि सबकुछ खत्म हो गया। फिर भी हार नहीं मानी। एक बड़े सपने के साथ न्यूयॉर्क चली गई। वहां पढ़ाई की और कुछ कंपनियों में जॉब की। उसके बाद खुद का बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। प्लान यह था कि खुद के साथ देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाए। ताकि उन्हें खर्च करने से पहले दस बार सोचना न पड़े।
नूतन ने ज्वेलरी डिजाइन क्षेत्र को चुना। वे कलात्मक रत्न के आभूषण बनाती है। उस पर चित्रकारी भी होती है। उनकी कंपनी नेक्टर में भारत की कई महिलाएं भी काम करती है, जो आभूषणों पर लोकचित्र बनाती है। नूतन राजस्थान की जेल में बंद कैदी महिलाओं की बनाई गुड़िया भी बेच रही है। वह कहती हैं कि ग्रामीण क्षेत्र के लोकचित्र हमेशा पसंद किए जाते है। मेरी कंपनी ने ऐसी ही महिलाओं को मंच दिया है और पैसा भी। इंदौर में भी ऐसे कुछ संगठनों से हमारी बात हुई है। इंदौर की महिलाओं को भी हम जोड़ रहे हैं।
कभी भी हार मत मानो
नूतन कहती है कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। कई बार लगता है कि सबकुछ खत्म हो गया, लेकिन यदि आपके मन में जिद है तो वही से अच्छी शुरूआत हो सकती है। तलाक के बाद मैने भी ग्राउंड जीरो से शुरुआत की। आठ साल तक भारत में अपने परिवार से नहीं मिल पाई थी। पहले खुद को साबित किया और हार नहीं मानी। इसके बाद जिंदगी में एक बेहतर मुकाम बनाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें सही दिशा नहीं मिल पाती है। मैं कोशिश करती हूं कि इस तरह के लोगों को आगे बढ़ने का रास्ता बता सकूं।