इंदौर की कई सहकारी आवास संस्थाओं में करोड़ों के घोटाले करने वाले भूमाफिया दीपक मद्दा को पुलिस ने मथुरा से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गुरुवार सुबह पुलिस उसे मथुरा से इंदौर लाई।
रासुका का केस होने के कारण पुलिस ने उसे रिमांड पर नहीं लिया और सीधे जेल पहुंचा दिया। यह पहला मौका है जब मद्दा सलाखों के पीछे है, जबकि उस पर अलग-अलग थानों में 15 प्रकरण दर्ज है, लेकिन हमेशा वह सेटिंग और राजनीतिक पहुंच से जेल जाने से बच जाता था और जमानत करवा लेता था।
दीपक मद्दा इतना शातिर है कि उसने एक बार तो रासुका आदेश निरस्त कराने के लिए एक अफसर का फर्जी पत्र लगाकर थाने से ही जमानत हासिल कर ली थी। जब अफसरों को फर्जी लेटर का पता चला तो उस पर इस मामले में एक और केस दर्ज हो गया।
हीना पैलेस को वैध कराने की कर ली थी तैयारी
मद्दा की सरकारी विभागों में भी तगड़ी साठगांठ थी। उसने पूर्वी क्षेत्र की हीना पैलेस कॉलोनी में जमीनें हथिया ली थी और लोगों से भी कब्जे हटवा रहा था। मद्दा ने तब नगर निगम के अफसरों से सेटिंग जमाकर कॉलोनी को वैध कराने की तैयारी कर ली थी, लेकिन फिर मामला अधर में लटक गया। मद्दा का शहर के कुछ बड़े भूमाफियों के साथ भी कॉकस है और वह उनके लिए भी काम निपटाता था।
डेढ़ साल से था फरार, सुनियोजित तरीके से पकड़ा
रासुका लगने के बाद पुलिस को डेढ़ साल से मद्दा की तलाश थी। उसने पहले के कई केसों में जमानत करवा ली, लेकिन रासुका में उसका जेल जाना तय था, हालांकि यह भी चर्चा है कि पुलिस ने उसे अचानक नहीं पकड़ा, बल्कि सुनियोजित तरीके से वह गिरफ्त में आया।