फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Election History: उम्मीदवारों की जीत का लगातार बढ़ता गया मार्जिन, हजारों वोटों से लाखों तक पहुंचा

सार

जब मतदान कम हुआ करता था तो उम्मीदवारों के विजयी होने का आंकड़ा छोटा हुआ करता था यानी हार जीत हजार मतों से हुआ करती थी। 2004 से 2019 तक प्रदेश में संपन्न हुए चार लोकसभा चुनावों में जीत और प्राप्त होने वाले मतों का रिकॉर्ड देखें तो पता चलता है कि उम्मीदवार भी अपने प्रतिद्वंद्वी से कई गुना आगे रहे हैं। 
विज्ञापन
मध्यप्रदेश लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आजादी के बाद मध्य प्रदेश में लोकसभा के 17 और 1956 में मध्य प्रदेश बनने के बाद 16 चुनाव संपन्न हो चुके हैं। आरंभ के दौर में मतदान प्रतिशत कम होता था, मतदाताओं की रुचि मतदान करने में  कम रहती थी। देश में साक्षरता का अभाव था। धीरे—धीरे इस व्यवस्था में बदलाव हुआ देश में शिक्षा का प्रचार हुआ। साक्षरता दर में वृद्धि हुई और धीरे-धीरे मतदान प्रतिशत में भी वृद्धि दर्ज की गई।  
विज्ञापन


जब मतदान कम हुआ करता था तो उम्मीदवारों के विजयी होने का आंकड़ा छोटा हुआ करता था यानी हार जीत हजार मतों से हुआ करती थी। 2004 से 2019 तक प्रदेश में संपन्न हुए चार लोकसभा चुनावों में जीत और प्राप्त होने वाले मतों का रिकॉर्ड देखें तो पता चलता है कि उम्मीदवार भी अपने प्रतिद्वंद्वी से कई गुना आगे रहे हैं। 2014 में साठ से सत्तर प्रतिशत मत प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों की संख्या 7 थी, जो 2019 के चुनाव में बढ़ कर 15 हो गई। जाहिर है उम्मीदवार, पार्टी, मतदाता जागरूकता से अधिक मतदान और महिला वोटरों की सहभागिता में वृद्धि से प्रत्याशियों को मिलने वाले मतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है।

उदय प्रताप सिंह की रिकॉर्ड जीत हुई
2019 में होशंगाबाद लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उदय प्रताप सिंह ने 8 लाख 53 हजार 22 मत प्राप्त किए, जो संसदीय क्षेत्र में हुए मतदान के 69.35 प्रतिशत थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस उम्मीदवार शैलेंद्र दीवान चंद्रभान सिंह को 25.61 प्रतिशत ही मत मिले इस तरह भाजपा उम्मीदवार की 5 लाख 53 हजार 682 मतों से जीत हुई जो रिकॉर्ड विजय थी।
विज्ञापन


2019 में प्रदेश की लोकसभा की कुल 29 में 28 सीटें भाजपा ने जीती थी। भाजपा के पांच लाख से अधिक विजयी होने वाले उम्मीदवारों की संख्या 3, चार से पांच लाख के मध्य विजयी होने वाले 4 और तीन से चार लाख वोटों के बीच विजयी होने वाले उम्मीदवारों की संख्या 9 थी। इससे जाहिर होता है कि उम्मीदवारों की जीत का मार्जिन बढ़ता ही जा रहा है। इसकी वजह निकटतम उम्मीदवार और दल का सक्रिय या कमजोर होना है।  

प्रदेश में 2004 से 2019 तक चार लोकसभा चुनावों में भाजपा के किसी उम्मीदवार की जमानत जब्त नहीं हुई, जबकि 2004 और 2009 के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो चुकी है।

2014 में बड़ी जीत
1 - इंदौर- सुमित्रा महाजन -भाजपा - 4 लाख 66 हजार 901 मतों से 
2- विदिशा- सुषमा स्वराज -भाजपा - 4 लाख 10 हजार 698 
सबसे कम मतों से जीत
1 -सतना- गणेश सिंह-भाजपा- 8 हजार 688 मतों से 
2 मुरैना-नरेंद्र सिंह तोमर-भाजपा-29 हजार 699

2019 में बड़ी जीत 
1-इंदौर-सुमित्रा महाजन-भाजपा-4 लाख 66 हजार 901 मतों से 
2-विदिशा- सुषमा स्वराज-भाजपा- 4 लाख 10 हजार 698 
सबसे कम मतों से जीत 
1-होशंगाबाद- उदयप्रताप सिंह-भाजपा-5 लाख 53 हज़ार 682 मतों से 
2-इंदौर-शंकर लालवानी-भाजपा-5 लाख 47 हजार 754 मतों से 
सबसे छोटी जीत
1-छिंदवाड़ा-नकुल नाथ-कांग्रेस- 37 हजार 536 मतों से 
2-रतलाम-गुमानसिंह डामोर-भाजपा-90  हजार 636 मतों से

प्रदेश में जीत के टूटते रिकॉर्ड मतदाताओं की जागरूकता और मतदान प्रक्रिया में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने का प्रमाण है। अब 2024 के चुनाव में किस क्षेत्र से कौन सा उम्मीदवार रिकॉर्ड तोड़ेगा, यह तो 4 जून को परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

वैध मतों में सर्वाधिक मत प्राप्त उम्मीदवारों का विवरण                 
चुनाव वर्ष  2004  31-40 प्रतिशत 41-50 प्रतिशत 51-60 प्रतिशत 61-70 प्रतिशत योग
उम्मीदवार संख्या 4 12 10 3 29
 
चुनाव वर्ष  2009 11-20 प्रतिशत 21-30 प्रतिशत 31-40 प्रतिशत योग
उम्मीदवार संख्या 8 18 3 29
 
चुनाव वर्ष  2014 40-50 प्रतिशत  50-60 प्रतिशत 60-70 प्रतिशत  योग
उम्मीदवार संख्या 7 15 7 29
 
चुनाव वर्ष  2019 40-50 प्रतिशत  50-60 प्रतिशत 60-70 प्रतिशत  योग
उम्मीदवार संख्या 3 11 15 29
विज्ञापन


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें