अलग-अलग कावड़ के साथ भक्ति का सफर
- फोटो : amarujala
बंगाली कांवड़ बनने में किए दस हजार खर्च
कांवड़ यात्रा में शामिल एक युवक की कांवड़ पीतल से बनी थी और काफी सजी-धजी थी। उसने बताया कि वह पांच साल से पैदल कांवड़ यात्रा में शामिल होता है। इस बार बंगाली कांवड़ से यात्रा करने की इच्छा थी। दस हजार का खर्च आया, लेकिन कांवड़ देखकर लोग आते हैं तो खुशी मिलती है। उसकी कांवड़ में फूल, मोरपंख और पीतल की घंटियां बंधी हैं। एक शिवभक्त तो कंधे पर शिव प्रतिमा को लेकर पैदल-पैदल चल रहे हैं।
बेटा और कांवड़ दोनों एक साथ
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नाबालिग भी उठा रहे कांवड़
कांवड़ यात्रा में नाबालिग भी कांवड़ उठाए चल रहे हैं। वे अपने माता-पिता या अन्य रिश्तेदार के साथ यात्रा में शामिल हैं। इसके अलावा एक पिता अपने कंधे के एक तरफ कांवड़ और एक तरफ बेटे को बैठाकर चलते नजर आए।
हर दिन 25 से 30 किमी पैदल यात्रा
कांवड़ के साथ शिवभक्त हर दिन 25 से 30 किलोमीटर पैदल यात्रा कर रहे हैं। हरी-भरी वादियों और पहाड़ों के बीच से पैदल चलते शिवभक्त रात में किसी मंदिर में विश्राम करते हैं। डेढ़ सौ किलोमीटर का सफर चार से पांच दिन में किया जा रहा है।