रेलवे बोर्ड के चेेयरमेन लाहोटी
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महाकाल लोक बनने के बाद दिल्ली से इंदौर आने वाली ट्रेनों में यात्रियों का दबाव बढ़ गया है, लेकिन अभी तक उज्जैन से सीधे दिल्ली तक कोई ट्रेन नहीं है। यात्रियों को बेवजह इंदौर तक का टिकट लेना पड़ता है, लेकिन भविष्य में रेलवे उज्जैन से दिल्ली तक सीधे ट्रेन चला सकता है। रेलवे बोर्ड के चेयरमेन अनिल कुमार लाहोटी ने कहा है कि हम पहले उज्जैन स्टेशन की क्षमता बढ़ाना चाहते है। इंदौर-उज्जैन दोहरीकरण का काम लक्ष्मीनगर स्टेशन के पास दो ब्लाॅक में बाकी है, जो सितंबर तक पूरा हो सकता है। उसके बाद उज्जैन से ट्रेन चलाई जा सकती है। लाहोटी इंदौर से जुड़े रेल के प्रोजेक्टों की समीक्षा करने इंदौर आए थे।
इंदौर आने वाली ट्रेन में 60 प्रतिशत तक उज्जैन के यात्री
इंदौर से दिल्ली के लिए चलने वाली ट्रेनों में आम दिनों में 60 प्रतिशत तक यात्री उज्जैन तक सफर करने वाले होते है। महाकाल लोक बनने के बाद बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग उज्जैन आने लगे है। अप्रैल में उज्जैन मेें आयोजित प्रदीप मिश्रा की कथा के समय तक इंदौर-दिल्ली की ट्रेन में 90 प्रतिशत यात्री उज्जैन स्टेशन पर उतरे और चढ़े थे। इसके अलावा आम दिनों मेें भी इस रुट पर चलने वाली ट्रेनों के ज्यादातर यात्री उज्जैन में दर्शन के लिए आते हैै।
साप्ताहिक ट्रेन के रुट में उज्जैन स्टेशन ही नहीं
सप्ताह में तीन दिन इंदौर से दिल्ली चलने वाली ट्रेन (20975) के रुट मेें भी उज्जैन नहीं है। यह ट्रेन इंदौर से बड़नगर, रतलाम,कोटा, मथुरा होते हुए दिल्ली जाती है। इस ट्रेन मेें सफर करने वाले ज्यादातर यात्री उज्जैैन में महाकाल दर्शन के लिए आते है, लेकिन ट्रेन के रुट में उज्जैन नहीं होने की वजह से उन्हें इंदौर आना पड़ता है। यहां से वे फिर बस या टैक्सी से उज्जैन जाते है। इससे उनकी यात्रा पर थोड़ी महंगी हो जाती है।
दोगुनी हो गई उज्जैन जाने वाले पर्यटकों की संख्या
महाकाल लोक बनने के बाद सात माह में उज्जैन शहर में पर्यटकों की संख्या दोगुनी हो गई है। सात माह में 30 छोटे-बड़े नए होटल उज्जैन मेें खुले है। इसके अलावा इंदौर उज्जैन रुट पर ढाबे और रेस्टोरेंट की संख्या भी 100 से ज्यादा हो गई। महाकाल मंदिर में पहले प्रतिदिन 30 से 35 हजार भक्त जाते थेे। अब 50 हजार से ज्यादा भक्त महाकाल लोक जाते है। त्योहार और अवकाश के दिनों में भक्तों का संख्या 70 हजार से एक लाख तक होने लगी है। तेजी से पर्यटन बढ़ने के बावजूद उज्जैन से दूसरे शहरों की रेल कनेक्टिविटी कम है।