इंदौर मेें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के लिए जल्दबाजी में हो रहे कामों में न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है और न ही इंजीनियरिंग का। जनता के पैसों पर निर्माण किए जा रहे हैं। वह भी घटिया। प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के लिए सुखलिया ग्राम चौराहे पर एक माह पहले रोटरी की दीवार बनी थी, जो एक माह भी साथ नहीं दे सकी। उसे सजाने के लिए उस पर पेंटिंग भी की गई थी, लेकिन अब दरार आने की वजह से उसके सामने नई दीवार बनानी पड़ रही है।
सम्मेलन के दौरान शहर में हो रहे निर्माण से शहरवासी इसलिए खुुश है कि उसके बहाने शहर मेें स्थायी तौर पर नए काम हो रहे हैं। हालांकि, जो निर्माण हो रहे हैं, उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। सुखलिया ग्राम चौराहे पर सम्मेलन के तीन दिन पहले अचानक 15 फीट लंबाई में दीवार बनाने का काम शुरू हुआ। नई दीवार को पहले बनी दीवार से सटाकर बनाया जा रहा है, क्योंकि पुरानी दीवार कमजोर बनी है और उसमें कुछ जगह दरारें आ गई है। अफसरों का कहना है कि नई दीवार को हम सुंदर और मजबूत बना रहे हैं।
10 डंपर भर दी मिट्टी
चौराहे पर बनी रोटरी में भराव करने में भी अफसरों ने दिमाग नहीं लगाया। दीवार की ऊंचाई चार फीट की है। ऊपरी सतह तक उसमें मिट्टी भर दी गई। दीवार मिट्टी का बोझ सह नहीं पाई और कमजोर हो गई।
बाउंड्री वॉल तोड़कर की फेेंसिंग
चौराहे के पास ही कम्यूनिटी हाॅल है। उसके परिसर में चारों तरफ बाउंड्री वाॅल है। नगर निगम ने एक हिस्से की बाउंड्री वॉल ही तोड़ दी है क्योकि वह पुरानी थी। उसकी मरम्मत करने केे बजाए अफसरों ने उसे तोड़ दिया और तारों की फेेंसिंग कर दी। फेंसिंग के आसपास दस फीट लंबे पेड लगा दिए। यहां के ब्रिज की रैलिंग पर ही नई रैलिंग वेल्ड कर दी गई।