स्वतंत्रता दिवस पर कैदियों की रिहाई
- फोटो : Amar Ujala
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इंदौर की सेंट्रल जेल से 12 कैदियों को रिहा किया गया। इनमें 11 पुरुष कैदी और एक महिला बंदी शामिल हैं। सभी कैदी हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। जेल में उनके अच्छे आचरण, अनुशासन और सुधारात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी को देखते हुए उनकी शेष सजा में छूट देते हुए रिहाई की गई। बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश की नई जेल नीति के तहत विशेष अवसरों पर पात्र बंदियों को सजा में छूट देकर रिहा किए जाने का प्रावधान है। इसी क्रम में 15 अगस्त, 26 जनवरी, 2 अक्टूबर, बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती और भगवान बिरसा मुंडा जयंती जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर जेल में बंद पात्र कैदियों की रिहाई की जाती है। इसी कड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर इंदौर सेंट्रल जेल में भी रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई।
जेल में सीखे बुनाई और सिलाई जैसे काम
रिहा किए गए कैदियों ने जेल में रहते हुए विभिन्न सुधारात्मक और व्यावसायिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने बुनाई, सिलाई सहित कई तरह के काम सीखे और इन कार्यों के जरिए पारिश्रमिक भी अर्जित किया। जेल प्रबंधन की ओर से रिहाई के दौरान उनकी मेहनत से अर्जित राशि उन्हें सम्मानपूर्वक सौंपी गई, ताकि जेल से बाहर निकलने के बाद वे अपने नए जीवन की शुरुआत बेहतर तरीके से कर सकें।
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शॉल और श्रीफल देकर किया सम्मानित
रिहाई के दौरान जेल प्रबंधन की ओर से सभी कैदियों को शॉल और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही रिहा हुए कैदियों ने भविष्य में अपराध की राह पर नहीं लौटने और समाज में जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जीने की शपथ भी ली। जेल प्रशासन का कहना है कि सजा का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बंदियों में सुधार और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाना भी है। जेल में रहते हुए जिन कैदियों ने अपने व्यवहार में सकारात्मक बदलाव दिखाया और सुधारात्मक गतिविधियों में भाग लिया, उन्हें नियमानुसार सजा में छूट का लाभ दिया गया। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हुई यह रिहाई इन कैदियों के लिए नई शुरुआत का अवसर बनी। अब रिहा हुए सभी 12 बंदियों ने अपराध से दूर रहकर सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया है।