मध्य प्रदेश सरकार को इस बात की जानकारी नहीं है कि कोरोना की पहली व दूसरी लहर में इंदौर में कितनी मौतें हुई हैं। सरकार अब तक इस बारे में जानकारी एकत्र नहीं कर पाई है। यह हम नहीं कह रहे बल्कि मप्र के स्वास्थ्य मंत्री का कहना है जिन्होंने विधानसभा में यह जानकारी दी है।
दरअसल इंदौर से कांग्रेस विधायक संजय शुक्ला ने इस बारे में विधानसभा में प्रश्न पूछा था। शुक्ला ने पूछा था कि कोरोना की पहली व दूसरी लहर में इंदौर में कितने लोगों की मौत हुई है। साथ ही यह भी पूछा था कि कोरोना काल में मृत व्यक्तियों के परिजनों को सरकार द्वारा क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन सवालों के जवाब में मप्र के स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी ने जवाब दिया कि कोरोना से इंदौर में कितनी मौते हुई हैं इसकी जानकारी एकत्र की जा रही है। कितने व्यक्तियों को अब तक मुआवजा दिया गया है इस बारे में राजस्व विभाग द्वारा निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जानकारी जुटाई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग बता रहा 1395 मौतें, फिर मंत्री को क्यों नहीं पता
कोरोना से हुई मौतों को लेकर प्रदेश की भाजपा सरकार शुरू से कांग्रेस के निशाने पर हैं। सरकार यह भी नहीं मान रही कि कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत हुई है जबकि दूसरी लहर के भयावह दौर में कितने ही लोगों ने ऑक्सीजन की कमी से दम तोड़ा था। मौत के सरकारी आंकड़े भी कम हैं, जबकि कांग्रेस कह चुकी है कि एक-एक जिले में हजारों मौते हुई हैं। इंदौर में कोरोना से अब तक 1395 मौतें सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हुई है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि मौतों की संख्या काफी ज्यादा है। सरकार भी इस बारे में जानकारी देने से बच रही है। हालांकि हैरानी इस बात की भी हो रही है कि इंदौर का स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि अब तक 1395 मौतें इंदौर में कोरोना से हुई हैं तो फिर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को इसकी जानकारी क्यों नहीं है। मुआवजे के मामले में भी कांग्रेस ने हमेशा सवाल उठाए हैं और इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया है।