इंदौर के चिड़ियाघर से रहस्यमय ढंग से गायब हुआ तेंदुआ पांच दिन बाद मिल गया है। आठ माह के मादा तेंदुए ने पांच दिन तक वन विभाग से लेकर चिड़ियाघर के अधिकारियों को खूब छकाया। शहर में लोग भी दहशत में थे कि तेंदुआ रिहायशी इलाके में हमला न कर दें। मंगलवार को तेंदुआ पकड़ में आया तो अफसरों ने राहत की सांस ली। चिड़ियाघर भी आमजनों के लिए खोल दिया गया है। तेंदुए को बुरहानपुर से इंदौर लाने और गायब होने से लेकर पकड़े जाने की कहानी...
जाल बिछाने के बाद पकड़ में आया तेंदुआ।
- फोटो : सोशल मीडिया
बुधवार को लाए थे बुरहानपुर से
वन विभाग ने बुरहानपुर से 8 महीने के मादा तेंदुए को रेस्क्यू किया था। इंदौर के चिड़ियाघर में इसे रखा जाना था। चिड़ियाघर के अधिकारियों ने सुबह बुलाया था, पर वन विभाग के कर्मचारी बुधवार रात को ही पहुंच गए। गुरुवार सुबह तक तेंदुआ वाहन में ही था। सुबह तेंदुए को पिंजरे में शिफ्ट करना था, पर वह तो था ही नहीं। इसके बाद चिड़ियाघर के 52 एकड़ क्षेत्र में तलाश शुरू हो गई। लगा था कि कुछ देर में मिल जाएगा, पर तेंदुआ तो जैसे लुका-छिपी खेलने के मूड में था।
इस तरह तेंदुए को पकड़कर ले जाया गया।
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200 लोगों की टीम लगाई, ढोल भी बजवाया
हैरानी की बात यह है कि 200 कर्मचारियों की टीम तैनात की गई थी। पुलिस से लेकर वन विभाग के कर्मचारी तक, नगर निगम के कर्मचारियों से चिड़ियाघर के कर्मचारियों तक, सब तेंदुए को तलाश रहे थे। सीसीटीवी कैमरों पर तेंदुआ नजर नहीं आया। चार दिन तक तेंदुए को खोजते रहे। ढोल भी बुलवाए गए। वन विभाग और चिड़ियाघर प्रशासन में आरोप-प्रत्यारोप भी हुए। कहा गया कि तेंदुआ चिड़ियाघर पहुंचा ही नहीं है। हो सकता है कि रास्ते में ही भाग गया हो। अटकलों के बीच टीम की तलाश जारी रही। वन मंत्री विजय शाह ने खुद सोमवार को इंदौर पहुंचकर तलाशी अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि कैमरों में दिखी तस्वीर तेंदुए की ही है। 11 दिसंबर को मामले की समीक्षा की बात भी कही।
इस वाहन में बैठाकर ले गए तेंदुए को।
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इस तरह आया पकड़ में
मंगलवार सुबह वन विभाग और चिड़ियाघर के अधिकारी तलाश में लगे थे। नवरतन बाग में तेंदुए के नजर आने की सूचना मिली। वन विभाग की महिला कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने तेंदुए को देखा है। उन्हें देखकर तेंदुआ दीवार फांदकर भाग गया। इसके बाद पूरा अमला नवरतन बाग के आसपास तैनात हो गया। तेंदुए को घेरा गया और जाल डालकर पकड़ा गया। तेंदुए की उम्र कम थी। पिंजरे की जरूरत नहीं पड़ी। कुछ कर्मचारी हाथों में पकड़कर उसे वाहन तक ले गए।