जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन (जयस) के संरक्षक विधायक हीरालाल अलावा और व्हिसल ब्लोअर डॉ. आनंद राय में इन दिनों जुबानी जंग चल रही है। एक समय था जब दोनों एक साथ थे मगर अब हालात बदल चुके हैं। एक-दूसरे के खिलाफ दोनों में जुबानी जंग जारी है। वजह चाहे जो रही हो मगर इन दिनों इन दोनों के बीच की दूरियां सियासी गलियारे में चर्चाओं में है।
दरअसल, हीरालाल अलावा जयस के संरक्षक हैं। वे मप्र के मनावर से कांग्रेस विधायक हैं। डॉ. आनंद राय ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर आदिवासियों से जुड़े मसले पर पोस्ट शेयर की थी, जिसके जवाब में विधायक अलावा ने डॉ. राय को खरीखोटी सुनाई है। अलावा के आरोप हैं कि राय आदिवासी समाज में भ्रम फैलाकर भोले-भाले आदिवासियों को भड़काकर आपस में लड़ाने और समाज में अशांति फैलाने का काम कर रहा है। इसके खिलाफ सरकार जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई करे अन्यथा कोई भी अनहोनी होगी तो उसके लिए सरकार भी जिम्मेदार होगी। इधर अलावा के आरोपों के जवाब में डॉ. आनंद राय ने जवाबी हमला कर लिखा कि इनकी भाषा शैली आरएसएस, भाजपा की भाषा शैली के समान है। कौन आदिवासियों के लिए लड़ रहा है, कौन सत्ता की मलाई खा रहा है यह आदिवासी समाज देख रहा है। जहां तक अनहोनी का प्रश्न है तो ऐसी गीदड़ भभकियों से शेर डरा नहीं करते। मैं एक गैर आदिवासी होकर भी आदिवासी समाज के लिए काम कर रहा हूं, उसका अगर दस प्रतिशत भी तुम लोग कर लोगे तो कार्यकर्ता तुम्हें संरक्षक स्वीकार कर लेगा।
किसी समय साथ काम करते थे दोनों
अलावा और राय के बीच चल रही इस जंग ने नई बहस को जन्म दे दिया है। यह बहस इसलिए हो रही है क्योंकि किसी समय दोनों एक साथ काम करते थे। सवाल उठाए जा रहे हैं कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो दोनों को इस हद तक एक-दूसरे के खिलाफ बोलना पड़ रहा है। अलावा ने जयस संगठन बनाकर अपनी शक्ति दिखाई और राजनीति में इंट्री हो गई मगर राय ऱाजनीति में सीधे तौर से नहीं जुड़े हैं। वे कांग्रेस के करीबी माने जाते हैं और कांग्रेस सरकार के दौरान ही इन दोनों की दोस्ती चर्चित रही थी। आबकारी से जुड़े कुछ वायरल ऑडियो भी चर्चा में रहे थे। राय राजनीति से दूर रहे थे मगर आदिवासियों के बीच उनकी पैठ थी और इसी दौरान वे अलावा के संपर्क में आए थे और दोनों की दोस्ती हो गई थी। अब यह बात सामने आ रही है कि अलावा की जगह राय किसी और को जयस संगठन में आगे लाना चाह रहे हैं, इसके चलते दोनों के बीच तकरार हो रही है। कुछ अन्य कारण भी बताए जा रहे हैं, लेकिन जिस तरह से दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं उससे इन दोनों के अलावा कांग्रेस और इनके करीबियों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जयस-कांग्रेस दोनों नावों की सवारी कर रहे अलावा
इस मामले में डॉ. आनंद राय का कहना है कि मसला केवल यह है कि हाल ही में जयस नेता रामदेव काकोरिया के खिलाफ बजरंग दल, आरएसएस के लोगों ने मॉब लिंचिंग का प्रयास किया। उनके खिलाफ केस दर्ज करवाकर उन्हें जिलाबदर करवा दिया। इस मामले में खातेगांव में बड़ा आंदोलन भी होगा। अगर ये जयस के संरक्षक है तो इनकी जिम्मेदारी बनती है। जयस के लोगों के लिए बोलना पड़ेगा। आंदोलन करना पड़ेगा। इसके पहले भी कई आदिवासी क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। विधायक अलावा को लेकर राय ने कहा कि जबसे इन्होंने कांग्रेस जॉइन की है तब से ये दोनों नावों की सवारी करना चाह रहे हैं। जयस की भी और कांग्रेस की भी। ये जयस के सर्वमान्य संरक्षक नहीं है।
राय ने कहा कि एक संगठन भाजपा द्वारा चलाया जा रहा है जो जनशक्ति आदिवासी युवा संगठन है, लेकिन इस संगठन के खिलाफ भी एक लाइन आज तक नहीं लिखी। अगर आप जयस से जुड़े कार्यकर्ताओं के लिए आवाज नहीं उठा रहे हो, आंदोलन नहीं कर रहे तो मतलब कहीं न कहीं आप भाजपा, आरएसएस से मिल गए हो। इनकी शादी में मुख्यमंत्री शिवराज, कैलाश विजयवर्गीय सहित भाजपा के कई लोग आए थे। हम लोग तो हमारा काम कर रहे है। जहां लगेगा हम बोलेंगे। मैं तो दिन-रात लड़ रहा हूं इनके लिए। ये नहीं लिख रहे, इनसे भाजपा लिखवा रही है। मैं अगर भड़का रहा हूं तो कैसे भड़का रहा हूं यह भी इनको बताना चाहिए।