एशिया के सबसे बड़े बायो सीएनजी प्लांट के उद्घाटन की तैयारियां शुरू हो गई है।
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एशिया के सबसे बड़े बायोमेथेनाइजेशन प्लांट के उद्घाटन की तैयारियां तेज होने लगी है। राज्य सरकार ने नगर निगम को कहा है कि 17 से 19 फरवरी के बीच में इसके लिए तैयारियां की जाए। इसके बाद से निगम ने तैयारियां शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे लेकिन उनका समय अभी तक तय नहीं हो सका है।
गौरतलब है कि इंदौर में एशिया का सबसे बड़ा बायो सीएनजी प्लांट जल्द शुरू होने जा रहा है। इस प्लांट में घरेलू गीले कचरे सब्जी, फल आदि के कचरे से बायो सीएनजी बनाई जाएगी, जिससे सैंकड़ों वाहन चलेंगे। इंदौर से प्रतिदिन 600 टन घर का गीला कचरा निकलता है जिसे नगर निगम डोर टू डोर कलेक्ट कर प्रोसेसिंग के लिए ट्रेन्चिंग ग्राउंड भेजता रहा है। अब इसी कचरे से दिल्ली की कंपनी प्रतिदिन करीब 18 हजार किलो बायो सीएनजी बनाएगी जो देश का पहला और एशिया का सबसे बड़ा प्लांट होगा। इससे नगर निगम को सालाना करीब ढाई करोड़ की कमाई तो होगी साथ ही 50 फीसदी बायो सीएनजी नगर निगम खुद सस्ती दर पर इस प्लांट से खरीद कर अपनी ढाई सौ सिटी बस चलाएगा। इस प्लांट की लागत 150 करोड़ रुपये है। पीपीपी मॉडल पर इसे बनाया गया है। इसकी क्षमता 550 मीट्रिक टन की रहेगी।
वर्चुअली उद्घाटन करेंगे प्रधानमंत्री
इस प्लांट का उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी के हाथों से किए जाने की तैयारियां की गई हैं। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री वर्चुअली इसका उद्घाटन करेंगे। हालांकि प्रधानमंत्री खुद इंदौर नहीं आएंगे, लेकिन केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास मंत्री और उनके विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े बड़े अफसर इंदौर आएंगे। ये इंदौर में दो दिन रूकेंगे। इसी तरह से इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। वहीं कार्यक्रम के पहले शहर में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। शनिवार को निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने निगम के सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुलाई थी। जिसमें उन्हें न सिर्फ शहर में सफाई अभियान, बल्कि सड़क के आसपास अतिक्रमण हटाने के साथ ही डिवाइडर्स की सफाई, नदी की सफाई के साथ ही शहर में ग्रीन बेल्ट में लाइटिंग लगाने के लिए भी निर्देश जारी किए। इस कार्यक्रम को नगर निगम स्वच्छता महोत्सव के तौर पर मनाने की तैयारी कर रहा है। उसी के हिसाब से पूरे शहर में तैयारी करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान शहर की प्रमुख इमारतों सहित नदी के किनारों पर भी उजाला किया जाएगा।