फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंदौर: वकीलों ने किया विरोध, ज्ञापन में कहा- मस्जिदों के लाउडस्पीकर से होने वाली अजान से हो रहा ध्वनि प्रदूषण, इसके इस्तेमाल पर लगाई जाए रोक

Tue, 11 Jan 2022 07:31 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

मस्जिदों में लाउडस्पीकर से होने वाली अजान का मामला फिर सुर्खियों में आया है। इस बार इंदौर में वकीलों ने इसका विरोध किया है। संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपा है। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मस्जिदों में लाउडस्पीकर से होने वाली अजान का मामला फिर सुर्खियों में आया है। इस बार इंदौर में वकीलों ने इसका विरोध किया है। संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कहा है कि शहर की विभिन्न मस्जिदों में अवैधानिक रूप से बगैर किसी विधिक अनुमति के लाउडस्पीकर से की जा रही अजान से ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की है।
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक वकीलों का एक समूह संभागायुक्त को ज्ञापन देने पहुंचा। इस ज्ञापन में करीब तीन सौ वकीलों ने दस्तखत किए। ज्ञापन में कहा है कि शहर की विभिन्न मस्जिदों में अवैधानिक और गैरकानूनी तरीके से बिना अनुमति के लाउडस्पीकर के माध्यम से अजान हो रही है। अन्य घोषणाएं भी हो रही हैं, जिससे ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। इससे जनमानस पर विपरीत मानसिक एवं शारीरिक प्रभाव पड़ रहा है। लाउडस्पीकरों के उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए।

ज्ञापन में यह भी कहा है कि कोरोनाकाल में कई घरों में बीमार लोग हैं। बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी चल रही है। इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम के तहत लोग घरों में रहकर काम कर रहे हैं। लाउडस्पीकर पर दी जाने वाली अजान की वजह से बीमारों को परेशानी हो रही है। बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। ज्ञापन के बावजूद अगर रोक नहीं लगाई गई तो वकील इस मामले में जनहित याचिका दायर करेंगे।
विज्ञापन


व्यक्ति के प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का हनन है
ज्ञापन में वकीलों ने न्यायालय के कुछ दृष्टांतों को भी रखा। बताया कि मप्र उच्च न्यायालय के आदेश क्रमांक 4792/2005 राजेंद्रकुमार वर्मा विरुद्ध मप्र शासन में ध्वनि प्रदूषण के संबंध में मानक स्थापित किए गए थे। इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 19 (1) व अनुच्छेद 21 को ध्वनि प्रदूषण से जीवन की हानि को जोड़ा गया। इसी प्रकार अनुच्छेद 51 (ए) जी के मौलिक कर्तव्यों में पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक भारतीय नागरिक की जिम्मेदारी को स्पष्ट करता है। इस प्रकार ध्वनि विस्तारक यंत्र जिसमें एम्प्लीफायर के उपयोग से होने वाला ध्वनि प्रदूषण भी जानलेवा माना गया है जो कि एक व्यक्ति के प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का हनन है।
कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा पारित मौलान मुफ्ती सईद विरुद्ध स्टेट ऑफ पश्चिम बंगाल मामले में निर्णित किया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्मपालन की स्वतंत्रता तो है, परंतु इसके तहत किसी को भी ध्वनि प्रदूषण करने का लायसेंसी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता है। वर्ष 1991 सर्वोच्च न्यायालय के एक चर्चा ऑफ गॉड इन इंडिया विरुद्ध केकेआर मैजेस्टिक कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन के मामले में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि किसी भी सभ्य समाज में ध्वनि प्रदूषण को किसी भी धार्मिक मामले से ऊपर नहीं रखा जा सकता। इसके तहत इससे होने वाली हानियों का भी स्पष्ट लेख किया गया है। 

सउदी अरेबिया में लगाई रोक
वकीलों ने ज्ञापन में लिखा कि सऊदी अरेबिया जहां करीब 94 हजार मस्जिदें हैं, उनमें से अधिकांश रहवासी क्षेत्रों में है। वहां के इस्लामिक मामलों के मंत्रालय ने इबादत के लिए लाउड स्पीकर के माध्यम से बुलावे हेतु पूर्णतः रोक लगा दी है। यह रोक इस्लामिक राष्ट्र के लोगों द्वारा उक्त से हो रहे शोर की शिकायतों के बाद लगाई गई है। मामला पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी है इसका किसी धर्म विशेष से कोई ताल्लुकात नहीं है। पूजा, प्रार्थना अथवा इबादत का एक निश्चित समय मस्जिदों में तय है। अतः पर्यावरण संरक्षण एवं मानव जीवन  के हित में तत्काल रोक लगाई जाए।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें